Yoni Dheela Karne Ke Gharelu Nuskhe

Yoni Dheela Karne Ke Gharelu Nuskhe Hindi

योनि का तंग या बिल्कुल बन्द हो जाना

स्त्रियों का यह रोग कई प्रकार का होता है। यदि योनि बिल्कुल बंद हो या इतनी अधिक संकुचित हो जाये कि सम्भोग क्रिया ही सम्पन्न न हो सके तो इसको अंग्रेजी में ‘एटरेसिया आॅफ वैजाइना’ कहा जाता है। यदि मैथुन- क्रिया में कष्ट हो तो इसे ‘वैजाइनिसमस’ कहा जाता है।

Yoni Tight Hone Ke Karan –

इसके दो कारण होते है –

(1) जन्म से ही योनि का बंद होना या न होना- योनि मात्र पतली-सी एक नाली होती है जिससे मासिक आया करता है तथा सम्भोग क्रिया सम्पन्न होती है और बच्चों की पैदाइष (जन्म) होता है। गर्भाषय के मुख के निकट या योनि के मध्य में कोई आप्राकृतिक मांस या मस्सा उत्पन्न होने से योनि में रूकावट पैदा हो जाती है। प्रायः ऐसा होता है कि कुमारी पर्दा हाईमन बहुत अधिक मोटा और बिना छेद के होता है। जिसके कारण योनि का मुख बंद रहता है। ऐसी परिस्थिति में मासिक धर्म के समय गर्भाषय में उदरषूल जैसा दर्द उठा करता है, जो पेट पर हाथ दबाने से बढ़ जाया करता है। जब गर्भाषय में अधिक मात्रा में रक्त एकत्र हो जाया करता है तो पेड़ का वह भाग फैल कर बड़ा हो जाया करता है तो पेडू का वह भाग फैल कर बड़ा हो जाया करता है। स्त्री को घोर कष्ट तथा पाखाना  के समय दर्द होता है।

(2) योनि संकोच- यह स्थिति किसी अन्य रोग के उपद्रव स्वरूप ही होती है। ऐसी अवस्था में पहले स्त्री बिल्कुल सही व स्वस्थ रहती है। अकसर योनि पर लगी श्लैष्मिक-कला शोथयुक्त होकर आपस में चिपक जाती है। जिसके कारण योनि का मार्ग बन्द हो जाता है। कभी-कभी योनि के दोनों ओष्ठ चिपक कर बंद हो जाते हैं। कभी-कभी योनि का बाहरी छिद्र तंग या बंद हो जाया करता है।    इस रोग के प्रमुख कारण- योनि की मांसपेषियों के तंतुओं का ऐंठ जाना, योनि की भीतरी श्लैष्मिक कला में शोथ, योनि में तरलता का अत्यधिक अभाव, कुमारी पर्दा की कठोरता, योनि के किसी बड़े घाव का इस प्रकार भरना कि उसकी रचना सिकुड़ जाये या घाव भरने के बाद बेकार का फालतू मांस वहां पैदा हो जाये या योनि में खुष्की उत्पन्न करने वाली औषधि का लम्बे समय तक रखते रहना आदि हैं।

Yoni Dheela Karne Ke Gharelu Nuskhe

यदि इस रोग का कारण फालतू मांस या कुमारी पर्दा हो तो शल्प क्रिया आवष्यक है। इसी प्रकार योनिकपाट के ओष्ठों और योनि की श्लैष्मिक कला के चिपक जाने पर भी शल्य क्रिया ही आवष्यक है। यदि योनि की मांषपेषियों की ऐंठन या खुष्की उत्पन्न करने वाली औषधियों के (योनि मे) स्थानीय प्रयोग से यह रोग हो तो- ग्लैसरीन या अच्छी वैसलीन साफ रूई में पूरी योनि में रखवायें। यदि शारीरिक खुष्की के कारण यह रोग हो तो दूध, मक्खन आदि का अधिक मात्रा में सेवन करें।