Shighrapatan ka gharelu ilaj nuskha hindi

Shighrapatan ka Gharelu Ilaj Nuskha Hindi

शीघ्रपतन की उत्पत्ति कैसे होती है?


आधुनिक परिवेश में अश्लील वातावरण में रहने, मस्तिष्क मे कमोत्तेजना की स्थिति बनी रहने से और हर समय सहवास की कल्पना मे खोए रहने वाले पुरुष शीघ्रपतन के शिकार होते हैं। किशोरावस्था में जो किशोर हस्तमैथुन करने लगते है, उनमें विवाह के बाद शीघ्रपतन की अधिक विकृति देखी जाती है।

अधिक उष्ण मिर्च-मसालों व अम्ल रसो से खाद्य-पदार्थों का सेवन करने, शराब पीने, चाय-काॅफी का अधिक सेवन करने और अश्लील फिल्म देखने वाले, अश्लील पुस्तकें पढ़ने वाले शीघ््रापतन से पीड़ित होते हैं। शीघ्रपतन में रोगी पुरुष स्त्री को पूरी संतुष्टि प्रदान नही कर पाता। पुरुष सहवास के बीच में ही स्खलित हो जाता है तो पत्नी क्रोध से फुफकार उठती है। शीघ्रपतन की विकृति पति-पत्नी में मन-मुटाव कराने के साथ अलगाव की स्थिति तक पहुंचा सकती है।

शीघ्रपतन से पीड़ित पुरुष स्त्री को यौनसुख नहीं दे पाते। स्त्रियों की प्रताड़ना से परेशान होकर पुरुष शीघ्रपतन के लिए अच्छे डॉक्टर, वैद्यों के पास नही जाते। जब पुरूष पोस्टर वाले ‘नीम-हकीमों‘ से चिकित्सा कराते हैं तो उन्हें लाभ के बजाय अधिक हानि उठानी पड़ती है। अनुभवी चिकित्सक से शीघ्रपतन की चिकित्सा करानी चाहिए।

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गुणकारी नुस्खे

  1. प्रातःकाल दो केले खाकर 250 ग्राम दूध पीने से धातु पुष्ट होती है। धातु पुष्ट होने से शीघ्रपतन की विकृति नष्ट होती है।
  2. इसबगोल की 5 ग्राम भूसी में मिसरी 3 ग्राम मिलाकर खसखस के शर्बत के साथ तीन सप्ताह तक सेवन करने से शीघ्रपतन की विकृति नष्ट होती है।
  3. अनार के छिलकों को छाया में सुखाकर, कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इसमे से 3 ग्राम मात्रा में चूर्ण लेकर जल के साथ सेवन करें। दो-तीन सप्ताह में शीघ्रपतन की विकृति नष्ट होने लगती है। सुबह-शाम चूर्ण सेवन करने से अधिक लाभ होता है।
  4. शुद्ध शिलाजीत 2 माशे, मधु 6 माशे मिलाकर चाटकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति नष्ट होती है।
  5. बड़े गोक्षुर को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण में घी और शक्कर मिलाकर चाटकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति का निवारण होता है।
  6. छुहारों को दूध में उबालकर पीने से शीघ्रपतन की विकृति नष्ट होती है। -कौंच के बीच का चूर्ण, तालमखाना और मिसरी, तीनों बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर सुबह-शाम 3-3 ग्राम चूर्ण खाकर, ऊपर से दूध पीने पर शीघ्रपतन की विकृति नष्ट हो जाती है।

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  7. गोखरु, वंशलोचन, छोटी इलायची और सत्व गिलोय सभी चीजें 30-30 ग्राम मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन 7-8 ग्राम चूर्ण मक्खन के साथ मिलाकर खाने से शीघ्रपतन की विकृति नष्ट होती है।
  8. प्याज के 10 ग्राम रस में मधु 7-8 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सुबह के समय चाटकर खाने से शीघ्रपतन विकृति से मुक्ति मिलती है।
  9. 10 ग्राम सेमल की छाल दूध में पीसकर उसमें मिश्री मिलाकर रोजाना सेवन करने से शीघ्रपतन ठीक हो जाता है।
  10. 2 ग्राम दालचीनी के पाउडर का सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य में वृद्धि होती है और शीघ्रपतन खत्म होता है।
  11. इलायची दाना, जावित्री, बादाम, गाय का मक्खन और शक्कर सभी को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर रोजाना सुबह खाने से धातु पुष्ट होती। है और शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।
  12. तुलसी के दो पत्ते और चार बीज प्रति दिन प्रातःकाल व सायंकाल पान में रखकर खाने से स्त्री संभोग के समय पुरूष को लाभ होता है और वह अधिक देर तक ठहरता है।
  13. काजू का हलुवा या खीर का सेवन लाभकारी होता है। सम्भोग से दो घंटे पूर्व इसका सेवन करें।
  14. चने की दाल 100 ग्राम, चारों मगज 5 ग्राम, बादाम की गिरियां 5 अदद, चिरौंजी 2 ग्राम, घी 20 ग्राम, आधा किलो दूध में सारी चीजें रात्रि को भिगो दें। प्रातः बादाम की गिरियां छीलकर छिल्के फेंक दें। बाकी सब चीजों को सिल पर बारीक पीस लें। फिर इन्हें घी में भून लें। जब भुन जाएं तो वही दूध ऊपर से डालकर गुनगुना पी जाए। 40 दिन तक सेवन से लाभ होगा।