Pregnancy Care Tips

Pregnancy Care – Healthcare tips of Pregnant Women

माता एवं षिषु के स्वास्थ्य की रक्षा के लिये जानने योग्य आवष्यक बातें

Pregnant women care in Pregnancy-Garbhavastha me Pregnant women kaise healthy rahe?

क) गर्भावस्था में स्वस्थ कैसे रहें ?
नारी के जीवन का महत्वपूर्ण समय गर्भावस्था का होता है। गर्भिणी स्त्री अनेक जटिलताओं का सामना करके प्रसव के समय भारी वेदना सहकर शिशु कों जन्म देती है। गर्भावस्था के समय कुछ आवष्यक बातें ध्यान में रखकर वह स्वस्थ रह सकती है तथा स्वस्थ षिषुकों जन्म दे सकती है। गर्भिणी के स्वास्थ्य- सम्बन्धी बातों का ज्ञान स्वयं गर्भिणी को तथा उसके पारिवारिक जनों को जानना अति आवष्यक है।

Pregnant Care In Hindi- माता और शिशु के स्वस्थ्य की रक्षा के नुस्खे और उपाय
Pregnant Care In Hindi- माता और शिशु के स्वस्थ्य की रक्षा के नुस्खे और उप

Pregnancy symptoms – Pregnancy Ke Lakshan

गर्भावस्था के सामान्य लक्षण-

(1) माहवारी का रूक जाना, (2) उलटियाँ आना,

(3) स्तन में परिवर्तन,

(4) खट्टी चीजें, चाक-मिट्टी खाने की इच्छा होना तथा

(5) बार-बार पेषाब होना।

Pregnant delivery time Care – Garbhavastha Prasav ka Samay  kya kare

मासिक धर्म से प्रसूतिका अनुमान- प्रसव का अनुमानित दिन केवल अनुमानित ही होता है। यह आवष्यक नहीं कि ठीक इसी दिन प्रसव हो, यह समय कुछ आगे-पीछे हो सकता है। साधारणतः मासिक धर्म होने के बाद प्रसूतिका समय 270 से 290 दिन के अंदर होता है, उसे जानने के लिए निम्ररीति से दिनों की संख्या जोड़ दी जाय तो प्रसूति≤ की कल्पना की जा सकती है-

उदाहरण- यदि दस जनवरी को मासिक धर्म हुआ है तो उसमें 7 मिलाने से 17 अक्टूबर को प्रसूति होने का समय समझना चाहिए।
गर्भावस्था में तनाव से बचे- गर्भवती महिला यदि किसी प्रकार मानसिक तनाव में रहती है तो इसका सीधा असर गर्भस्थ षिषु पर पड़ता है। इसलिये गर्भावस्था में स्त्रियों को प्रसन्न रहना चाहिये, ताकि बच्चा स्वस्थ हो। गर्भ में षिषु सचेतन प्राणी होता है तथा उसका अवचेतन मस्तिष्क उस अवधि की स्मृतियों को भलीभाँति संजोये रहता है। माता के संवेगों को वह जल्दी ही अपने अंदर समेट लेता है। गर्भवती को अपने षिषु के भविष्य के लिये प्रसन्न एवं आषावादी रहना चाहिये।

Pregnancy Food – Garbhaavstha Me Pregnant Women kya khaye kya nahi  –

गर्भवती स्त्रियों का आहार- गर्भावस्था में षिषु अपने पोषण के लिये माँ पर निर्भर रहता है। इस दौरान माँ को सामान्य की अपेक्षा 300 कैलोरी से अधिक ऊर्जा का सेवन करना पड़ता है। अतः उसे विषेष ऊर्जा, शक्ति तथा पोषक तत्वों की आवष्यकता पड़ती है।

1- कैल्षियम-  दूध, दूध से बने पदार्थ, अखरोट, बादाम, पिस्ता आदि। उपयोग:-भू्रण की हड्डियों एवं दाँतों के विकास के लिये जरूरी तत्व।
आयरन- सूखे फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, ताजे फल आदि। उपयोग:- भू्रण में रक्त- कोषिकाओं के निर्माण के लिये बहुत आवष्यक।

2- विटामिन्स- ताजे फल, हरी सब्जियाँ, अंकुरित अनाज, सलाद आदि। उपयोग:- स्वस्थ प्लेसेन्टा (नाल) तथा आयरन के शोषण के लिये।
फाॅलिक एसिड- हरी पत्तेदार सब्जियाँ, अनाज आदि। उपयोग:- बच्चे के स्नायु तन्त्र के विकास के लिये।

3- जिंक- अनाज, दालें इत्यादि। उपयोग:- बच्चे के ऊतकों के विकास के लिये।

4- कैल्षियम, फास्फोरस तथा विटामिन ‘डी’ प्राप्त करने के लिए गर्भिणी को चाहिये कि वह सिर पर तौलिया रखकर प्रतिदिन थोड़ी देर तक धूप लेती रहे। माता के शरीर में मात्र कैल्षियम की कमी होने के कारण बच्चों को सूखा रोग हो जाता है तथा उनके दाँत जीवन भर खराब रहते हैं। इसलिये गर्भवती महिला के आहार का विषेष ध्यान रखना चाहिए।

गर्भधारण के बाद प्रथम माह से नवम माह तक का खान-पान- गर्भवती महिला को गर्भ के नौ महीने के दौरान ऐसे खान-पान का सेवन करना चाहिये जो कि उसके स्वास्थ्य के अनुकूल हो। अगर गलत खान-पान की वजह से माँ को कोई तकलीफ होती है तो उसका बुरा असर गर्भ में पल रहे षिषु के स्वास्थ्य पर भी पड़ना निष्चित हैं।

After Pregnancy Pregnant Woman food – Garbhavstha Ke bad Healthy hone ke liya Mahila  ka Food

गर्भधारण के बाद-

9 mahine tak Garbhaavstha me kya khaye –

First Month After Pregnant Women Food

1st Month प्रथम माह- पहले महीने के दौरान गर्भवती को सुबह-षाम मिश्री मिला दूध पीना चाहिए। सुबह नाष्ते में एक चम्मच मक्खन, एक चम्मच पिसी मिश्री और दो-तीन काली मिर्च मिलाकर चाट लें। उसके बाद नारियल की सफेद गरी के दो-तीन टुकड़े खूब चबा-चबाकर खा ले और अन्त में पाँच-दस ग्राम सौंफ खूब चबा-चबाकर खाये।

Second Month After Pregnant Women Food

2 nd month – द्वितीय माह- दूसरा महीना शुरू होने पर रोजाना दस ग्राम शतावार का बारीक पाउडर और पिसी मिश्री को दूध में डालकर उबालें। जब दूध थोड़ा गर्म रहे तो इसे घूँट-घूँट करके पी लें। पूरे माह सुबह और रात में सोने से पहले इसका सेवन करे।

Third Month After Pregnant Women Food

3 rd month तृतीय माह- तीसरा महीना शुरू होने पर सुबह-षाम एक गिलास ठंडे किये गये दूध में एक चम्मच शुद्ध घी और तीन चम्मच शहद घोलकर पीये। इसके अलावा गर्भवती को तीसरे महीने से ही सोमघृत का सेवन शुरू कर देना चाहिए और आठवें महीने तक जारी रखना चाहिये।

Fourth  Month After Pregnant Women Food

4 th month चतुर्थ माह- चैथे महीने में दूध के साथ मक्खन का सेवन करे।
5 th month पच्चम माह- पाँचवें महीने में सुबह-षाम दूध के साथ एक चम्मच शुद्ध घी का सेवन करे।

6 th month षष्ठ माह- छठे महीने में भी शतावर का चूर्ण और पिसी मिश्री डालकर दूध उबालें, थोड़ा ठंडा करके पीये।

7 month सप्तम माह- सातवें महीने में छठे महीने की तरह ही दूध पीये, साथ ही सोमघृत का सेवन बराबर करती रहे।

8 th monthअष्टम माह- आठवें महीने में भी दूध, घी, सोमघृत का सेवन जारी रखना चाहिए। साथ ही शाम को हल्का भोजन करे। इस महीने में गर्भवती को अक्सर कब्ज या गैस की षिकायत रहने लगती है, इसलिये तरल पदार्थ ज्यादा ले। यदि कब्ज फिर भी रहे तो रात में दूध के एक-दो चम्मच ईसबगोल ले।

9 th month नवम माह- नवें महीने में खान-पान का सेवन आठवें महीने की तरह ही रखे। बस इस महीने में सोमघृत का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।

Garbhavstha – Pregnancy Me Work aur Exercise –

गर्भावस्था में करने योग्य कार्य-
(1) गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को अपना मन सदैव प्रसन्न रखना चाहिये।

(2) गर्भवती को अच्छे साहित्य का अवलोकन तथा महापुरूषों के जीवन-चरित्र के ऊँचे आदर्षों का चिन्तन-मनन करना चाहिए।

(3) गर्भकाल के दौरान सदा ढीले वस्त्र पहनना चाहिये। कसे वस्त्रों से बच्चे के विकलांग होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

(4) गर्भवती महिला की दिनचर्या नियमित होनी चाहिये तथा घरेलू कार्यों को करते रहना चाहिये।

(5) ज्यादा समय खाली पेट नहीं रहना चाहिये। नियमित समय पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन ग्रहण करे।

(6) यदि गर्भवती महिला स्वयं को अस्वस्थ महसूस करती है तो थोड़ी मात्रा में किसी मीठी चीज का सेवन कर ले।

(7) तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

(8) गर्भावस्था के दौरान संयम रखे, सहवास न करे।

(9) कोई भी दवा लेने से पूर्व चिकित्सक की सलाह ले।

(10) गर्भवती के स्तनों में कोई दोष हो तो इसका उपचार यथाषीघ्र करना चाहिये।

Garbhavstha – Pregnancy Exercise

1- व्यायाम- गर्भावस्था के दौरान अधिक थकान पैदा करने वाले व्यायाम, मेहनत के काम, उछलना-कूदना एकदम बंद कर देना चाहिये। सुबह-शाम खुली हवा में टहलना चाहिये।

2- गर्भवती का डॅाक्टरी परीक्षण- गर्भधारण का पता चलने पर गर्भवती महिला को तुरंत स्त्री-रोग-विषेषज्ञ को दिखाना चाहिये। गर्भवती को प्रसव होने तक लगातार बार-बार जाँच करानी चाहिये। जिसमें शुरू के छः-सात महीनों में महीने में एक बार तथा सातवें, आठवें और नवें महीने में दस-पंद्रह दिन में एक बार जाँच करनी चाहिये। इन दिनों में ब्लडप्रेषर, खून-पेषाब आदि की जाँच समय≤ पर वह कराती रहे। गर्भवती को अपना वजन हर माह जाँच कराना चाहिये। गर्भकाल में आठ से दस किलो वजन बढ़ता है। यदि वजन अधिक होने लगे तो मीठा एवं चिकनाई युक्त आहार कम कर देना चाहिये।

3- इन नियमित जाँचों के दौरान चैथे-पाँचवें महीने में पहला और पाँचवें- छठे महीने में दूसरा (एक माह के अन्तर से) टिटनस/वैक्सीन का टीका अवष्य लगवा लेना चाहिये।
4- इस तरह शुद्ध सात्त्विक जीवन बिताने वाली माताएँ स्वस्थ-सुन्दर और श्रेष्ठ बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

Garbhavstha – Pregnancy me Mahila ke Health Safe Rakhne Ke Nuskhe

(ख) नवप्रसूता के लिये स्वास्थ्य रक्षक नुस्खें
1- सामान्यतः देखा जाता है कि महिलाएँ प्रसव के बाद अपना पूरा ध्यान षिषु की तरफ लगा देती है। अपनी शारीरिक देखभाल की ओर उनका ध्यान नहीं रहता है, जिससे वे कमजोर और षिथिल हो जाती हैं। इस समय नवप्रसूता को उचित खान-पान तथा घरेलू उपचार से स्वस्थ एवं सुन्दर बनाया जा सकता है।

2 – प्रसव के समय गर्भवती स्त्री को गर्म दूध में 6-7 खारक (छुहारा) तथा केसर डालकर पिलाये। इससे प्रसव आसानी से कम कष्ट में होगा। इसके बाद 3 ग्राम हीराबोल का चूर्ण और 10 ग्राम गुड़ का मिश्रण बनाये, इसकी समान वजन की छः गोली बना लें। प्रसव के पश्चात् दो गोली प्रतिदिन तीन दिन तक सेवन कराये। इससे गर्भाषय की शुद्धि होती है।

3- पीने का पानी- प्रसव के बाद प्रसूता को चालीस दिनों तक ठंडे पानी का सेवन नहीं करना चाहिये। ठंडे पानी का किसी भी रूप में उपयोग नही करना चाहिये। प्रसव के बाद पहले सप्ताह से निम्नलिखित विधि से पानी का सेवन करना चाहिये-
पानी 5 लीटर, 5-6 गाँठ सोंठ, 5-7 लौंग तथा 50 ग्राम अजवाइन डालकर उबाल लें। ठंडा होने पर, छानकर किसी बरतन में भरकर रख दे। पहले आठ दिन इसी पानी का सेवन करना चाहिये। इसके बाद एक महीने सिर्फ गर्म पानी ठंडा करके पीये। इसके बाद ताजा पानी शुरू कर दें।
यदि हो सके तो प्रसूता को 10 दिन तक तो अन्न का सेवन नही करना चाहिये। हरीरा और गर्म दूध देना चाहिये। मेवे का हलुवा भी दे सकते हैं। ग्यारहवें दिन से अन्न का सेवन शुरू करे।

4- हरीरा बनाने के लिये सामग्री- 200 ग्राम अजवाइन, 100 ग्राम सोंठ, 10 ग्राम पीपल, 10 ग्राम पीपलामूल, 100 ग्राम बादाम, 200 ग्राम छुहारा, 200ग्राम गोंद तथा आवष्यकतानुसार शुद्ध घी एवं गुड़ ले।
हरीरा बनाने की विधि- अजवाइन, सोंठ, पीपल तथा पीपलामूल को कूटकर अलग रख लें। बादाम, खारक (छुहारा) तथा मेवा काटकर रख लें। समस्त सामग्री को दस भागों में करके पुड़िया बना ले। एक पुड़िया प्रतिदिन उपयोग में लाये।
सर्वप्रथम कड़ाही में घी डालकर 20 ग्राम गोंद तले, इसके पष्चात् पहली चारों चीजों की एक-एक पुड़िया डालकर भूने, उसमें अंदाज से गुड़ डालकर चलाये। अब दो कप पानी डाले। थोड़ा गाढ़ा होने पर पिसी गोंद और मेवा डालकर आँच से नीचे उतारे। हरीरा गर्म दूध के साथ सेवन करें।

5- भोजन- भोजन में हरी सब्जी, मूँग की दाल और चपाती देना चाहिये। पाँच गाँठ सोंइ तथा बीस लौंग पीसकर शीषी में रख लें, भोजन करते समय दाल-सब्जी में यह चूर्ण डाल दे। सुबह-षाम लड्डू खाने के एक घंटे तक पानी का सेवन नहीं करना चाहिये। खाना खाने के बाद भुनी हींग का सेवन करना चाहिये।

Mata aur sishu ke swasthy ki Protection ke liye janne yogya avasyak baaten Urdu

(1) Garbhavastha mein swasth kaise rahen?

Nari ke jeevan ka mehtvpurn samay garbhavastha ka hota hai. garbhidi estri anek jatiltaon ka samna karke prasav ke samay bhari vedna sehkar sishu ko janm deti hai. garbhavastha ke samay kuch avashyak baaten dhyan mein rakhkar vah swasth reh sakti hai tatha swasth sishu ko janm de sakti hai. garbhidi ke swasthy-sambandhi baton ka gyan swayam garbhidi ko tatha uske parivarik jano ko janna ati avashyak hai.

Garbhavastha ke samany lakshan –

(1) mahavari ka ruk jana, (2) ultiyan aana, (3) estan mein parivartan, (4) khatti cheejen, chalk-mitti khane ki iccha hona tatha (5) baar-baar peshab hona.

Mashik dharm se prasuti ka anuman- prasav ka anumanit din keval anumanit hi hota hai. yeh avashyak nahi ki theek isi din prasav ho, yeh samay kuch aage-peche ho sakta hai. sadhardta mashik dharm hone ke baad prasutika samay 270 se 290 din ke andar hota hai, use janne ke liye nimrriti se dino ki sankhya jod di jaye to prasuti – samay ki kalpana ki ja sakti hai.

Example- yadi 10 january ko mashik dharm hua hai to usme 7 milane se 17 october ko prasuti hone ka samay samajna chahiye.
Garbhavastha mein tanav se bache- garbvati mahila yadi kisi prakar manshik tanav mein rehti hai to iska sidha asar garbhsth sishu per padta hai. isliye garbhavastha mein estriyoun ko prasnn rehna chahiye, taaki baccha swasth ho. manusy ki jindagi ka sabse mehtvpurn samay ishke janm se pehle ka hota hai. garbh mein sishu sachetan pradi hota hai tatha uska avchetan mashtisk us avdhi ki esmratiyoun ko bhalibhanti sanjoye rehta hai. mata ke samvego ko vah jaldi hi apne andar samet leta hai. garbvati ko apne sishu ke bhavisy ke liye prasann avam ashavadi rehna chahiye.

Garbhvati Mahila ka bhojan –

Garbhvati estriyoun ka aahar- Garbhavastha mein sishu apne poshad ke liye maa per nirbhar rehta hai. is dauran maa ko samany ki apecha 300 calori se adhik urja ka sevan karna padta hai. atah use vishesh urja, sakti tatha poshak tatvon ki avasyakta padti hai.


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1- Calcium- doodh, doodh se bane padarth, akhrot, badam, pista aadi. upyog- bhrood ki haddiyoun avam daanton ke vikas ke liye jaruri tatv.

2- Iron- sukhe fal, hari pattedar sabjiyan, taaze fal aadi. upyog- bhrood mein rakt-koshikaon ke nirmad ke liye bahut avasyak.
Vitamins- taaze fal, hari sabjiyan, ankurit anaj, salad aadi. upyog- swasth plesenta (naal) tatha iron ke soshad ke liye.

3- Folik acid- hari pattedar sabjiyan, aanaj aadi. upyog- bacche ke estrayu-tantra ke vikas ke liye.

4- Jink- aanaj, daalen ityadi. upyog- bacche ke uttakon ke vikas ke liye.

5- Calcium, fasforas tatha vitamin d prapt karne ke liye garbhidi ko chahiye ki vah sir per tauliya rakhkar pratidin thodi der tak dhoop leti rahe. mata ke sareer mein matra calcium ki kami hone ke karad bacchon ko sukha rog ho jata hai tatha unke daant jeevan bhar kharab rehte hai. isliye garbhvati mahila ke aahar ka visheh dhyan rakhna chahiye.
Gharbhdharad ke baad pratham maah se navam maah tak ka khan-paan – garbhvati mahila ko garbh ke nau mahine ke dauran aise khan-paan ka sevan karna chahiye jo ki uske swasthy ke anukool ho. agar galat khan-paan ki vajah se maa ko koi taqleef hoti hai to uska bura asar garbh mein pal rahe sishu ke swasthy per bhi padna nischit hai.

Pregnant Hone bad 9 month kya khaye aur kya work aur kya exercise kare

Garbhdharad ke baad- 


1st month in Pregnancy Pratham maah- pehle mahine ke dauran garbhvati ko subah-saam mishri mila doodh peena chahiye. subah nashte mein ek chammach makhan, ek chammach pishi mishri aur 2-3 kali mirch milakar chaat le. uske baad nariyal ki safed gari ke 2-3 tukde khoob chaba-chabakar khayen.

2nd month in Pregnancy Dwitiya maah- dushra mahina suru hone per rojana das gram satavaar ka bareek powder aur pishi mishri ko doodh mein daalkar ubalen. jab doodh thoda garam rahe to ise ghoont-ghoont karke pee le. pure maah subah aur raat mein sone se pehle iska sevan kare.

3rd month in Pregnancy Tratiya maah- teeshra mahina suru hone per subah-saam ek gilass thande kiye gaye doodh mein ek chammach sudh ghee aur teen chammach sehed ghoalkar piyen. iske alava garbhvati ko teesre mahine se hi somghrut ka sevan suru kar dena chahiye aur aathven mahine tak jaari rakhna chahiye.

4th  month in Pregnancy Chaturth maah- chauthe mahine mein doodh ke sath makkhan ka sevan karen.

5 th month in Pregnancy Pancham maah-  panchve mahine mein subah-saam doodh ke sath ek chammach sudh ghee ka sevan karen.

6 th  month in Pregnancy Shasth maah-  chate mahine mein bhi sataavar ka churn aur pishi mishri daalkar doodh ubalen, thoda thanda karke piyen.

7 th  month in Pregnancy Saptam maah- saatven mahine mein chate mahine ki tarah hi doodh piyen, sath hi somghrut ka sevan barabar karti rahen.

8 th month in Pregnancy Ashtam maah- aathven mahine mein bhi doodh, ghee, somghrut ka sevan jari rakhna chahiye. sath hi saam ko halka bhojan karen. is mahine mein garbhvati ko aksar kabz ya gas ki sikayat rehne lagti hai, isliye taral padarth jyada le. yadi kabz phir bhi rahe to raat mein doodh ke 1-2 chammach isabgoal le.

9 th  month in Pregnancy Navam maah- naven mahine mein khan-paan ka sevan aathven mahine ki tarah hi rakhe. bas is mahine mein somghrut ka sevan bilkul band kar de.

Garbhavastha mein Work Aur Exercise –

(1) garbhavastha ke dauran garbhvati ko apna man sadaiv prasann rakhna chahiye.

(2) garbhvati ko acche sahitya ka avlokan tatha mahapurushon ke jeevan-charit ke unche aadarshon ka chintan-manan karna chahiye.

(3) garbhkaal ke dauran sada dheele vastra pehnna chahiye. kase vastron se bacche ke viklang hone ki sambhavna bad jati hai.

(4) garbhvati mahila ki dincharya niymit honi chahiye tatha gharelu karyoun ko karte rehna chahiye.

(5) jyada samay khali pet nahi rehna chahiye. niymit samay per thodi-thodi matra mein bhojan grahad karen.

(6) yadi garbhvati mahila swayam ko aswasth mehsus karti hai to thodi matra mein kisi meethi cheej ka sevan kar le.

(7) tailiy khadh padarthon ka sevan karen.

(8) garbhavastha ke dauran sayam rakhe, sehvaas na kare.

(9) koi bhi dawa lene se pehle chikitsak ki salah le.

(10) garbhvati ke estano mein koi dosh ho to iska upchar yathashigra karna chahiye.

Garbhaavstha – Pregnancy Me Exercise –

vyayam- garbhavastha ke dauran adhik thakan paida karne wale vyayam, mehnut ke kaam, uchalna-koodna ekdum band kar dena chahiye. subah-saam khuli hawa mein tehelna chahiye.
garbhvati ka doctari parichad-  garbhdharad ka pata chalne per garbhvati mahila ko turant estri-rog-visesyag ko dikhana chahiye. garbhvati ko prasav hone tak lagatar baar-baar janch karni chahiye. jisme suru ke 6-7 mahino mein mahine mein ek baar tatha saatven, aathven aur naven mahine mein 10-15 din mein ek baar janch karni chahiye. in dino mein bloodpresure, khoon-peshab aadi ki janch samay-samay per vah karati rahen. Garbhvati ko apna vajan har maah janch karana chahiye. garbhkal mein 8 se 10 kilo vajan badta hai. yadi vajan adhik hone lage to meetha avam chiknai yukt aahar kam kar dena chahiye.
in niyamit jancho ke dauran chauthe-panchve mahine mein pehla aur panchven- chate mahine mein dushra (ek maah ke antar se) titnus/vaxcene ka teeka avasya lagva lena chahiye.
is tarah sudh saatvik jeevan bitane wali matayen swasth-sundar aur sresth bacche ko janm de sakti hai.

(b)  Garbhavstha me Health Protection ke Upchar Treatment Home base –

Garbhaavstha – Pregnancy me Food

Samanyta dekha jata hai ki mahilayen prasav ke baad apna pura dhyan sishu ki taraf laga deti hai. apni saarerik dekhbhal ki oar unka dhyan nahi rehta hai, jisse ve kamjor aur shithil ho jati hai. is samay navprasuta ko uchit khan-paan tatha gharelu upchar se swasth avam sundar banaya ja sakta hai.
Prasav ke samay garbhvati estri ko garam doodh mein 6-7 khurak (chuhara) tatha kesar daalkar pilayen. isse prasav aasani se kam kast mein hoga. iske baad 3 gram heeraboal ka churn aur 10 gram gud ka mishrad banayen. iski samaan vajan ki 6 goli bana le. prasav ke paschat 2 goli pratidin 3 din tak sevan karaye. isse garbhasy ki sudhi hoti hai.
Peene ka pani- prasav ke baad prasuta ko 40 dino tak thande pani ka sevan nahi karna chahiye. thande pani ka kishi bhi roop mein upyog nahi karna chahiye. prasav ke baad pehle saptah se nimnlikhit vidhi se pani ka sevan karna chahiye-
Pani 5 litre, 5-6 ganth soth, 5-7 laung tatha 50 gram ajwaeen dalkar  ubal le. thanda hone per, chankar kishi bartan mein bharkar rakh de. pehle 8 din ishi pani ka sevan karna chahiye. iske baad ek mahine sirf garam pani thanda karke piyen. iske baad taaza pani suru kar de.

Yadi ho sake to prasuta ko 10 din tak to ann ka sevan nahi karna chahiye. hareera aur garam doodh dena chahiye. meve ka halua bhi de sakte hai. gyarhaven din se ann ka sevan suru karen.

hareera banane ke liye samagri- 200 gram ajwaeen, 100 gram soth, 10 gram peepal, 10 gram peeplamool, 100 gram badam, 200 gram chuhara, 200 gram goand tatha avasyaktanushar sudh ghee avam gud le.

Hareera banane ki vidhi- ajwaeen, soth, peepal tatha peeplamool ko kuttkar alag rakh le. badam, kharak(chuhara) tatha meva kattkar rakh le. samast saamagri ko 10 bhagon mein karke pudiya bana le. ek pudiya pratidin upyog mein laaye.

Sarvpratham kadahi mein ghee daalkar 20 gram goand talen. Iske paschat pehli charon cheejon ki ek-ek pudiya daalkar bhoone, usme andaz se gud daalkar chalayen. Ab 2 cup pani daalen. thoda gaada hone per pishi goand aur meva daalkar aanch se neche  utaare. hareera garam doodh ke sath sevan karen.

Bhojan- bhojan mein hari sabji, moong ki daal aur chapatti dena chahiye. 5 ganth soai tatha 20 laung pesskar sishi mein rakh le. bhojan karte samay daal-sabji mein yeh churn daal de. subah-saam laddoo khane ke 1 ghante tak pani ka sevan nahi karna chahiye. khana khane ke baad bhuni hing ka sevan karna chahiye.