Polyuria (Bahumutra) Frequent Urination Gharelu Upay

Polyuria (Bahumutra) Frequent Urination Gharelu Upay

Polyuria (Bahumutra) Frequent Urination Gharelu Upay

बहुमूत्रता (अधिक मूत्र निष्कासन)

बहुमूत्रता की विकृति में स्त्री-पुरुष को दिन और रात में कई-कई बार मूत्र त्याग के लिए जाना पड़ता है। रात्रि में बहुमूत्रता के रोगी को अधिक परेशानी होती है, क्योंकि मूत्र त्याग के लिए रोगी को 5-6 बार उठना पड़ जाता है। नींद के अभाव में रोगी का स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगता है। बहुमूत्रता का रोगी के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभावपड़ता है।

बहुमूत्रता अर्थात बार-बार मूत्र के लिए जाने की विकृति किसी दूसरे रोग के कारण हो सकती है। मधुमेह रोग में रोगी को बार-बार मूत्रत्याग के लिए जाना पड़ता है। रोगी को अधिक प्यास लगती है। मूत्र का परीक्षण कराने से मधुमेह रोग का पता चलने पर उसकी चिकित्सा करानी चाहिए। मधुमेह रोग में शर्करा पर नियंत्रण होने से बहुमूत्र की विकृति कम हो जाती है।

वंशानुगत क्षय रोग होने पर बहुमूत्रता की विकृति हो सकती है। युवा लड़कियों के हिस्टीरिया रोग से पीड़ित होने पर बहुमूत्रता की विकृति देखी जाती है। यकृत औरआमाशय में विकृति होने पर बार-बार मूत्रत्याग की परेशानी हो सकती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार किसी गहरी चिंता से पीड़ित होने पर, अधिक भयभीत होने पर, अधिक शराब पीने की आदत होने पर जल्दी-जल्दी मूत्र-त्याग के लिए जाना पड़ता है।

कोष्ठबद्धता (कब्ज), पाचन क्रिया की विकृति, यौन रोग होने की स्थिति में भी बहुमूत्रता की विकृति हो सकती है। सिर पर आघात लगने से भी बार-बार मूत्रत्याग के लिए जाना पड़ता है। ज्वर की तीव्रता में भी अधिक प्यास के साथ बार-बार मूत्रत्याग के लिए जाना पड़ता है। सर्दी लग जाने पर बहुमूत्रता की
विकृति हो सकती है।वैसे भी सर्दी में सभी को अधिक बार मूत्र-त्याग के लिए जाना पड़ता है। वृक्क षोध (गुर्दो में सूजन) होने पर भी रोगी को अधिक मूत्र आने की विकृति हो सकती है।’

Ayurvedic Nuskhe|Gharelu Nuskhe |Ilaj For Polyuria (Bahumutra) Frequent Urination

  1. 30 ग्राम आंवलों का रस, 100 ग्राम जल में मिलाकर पीने से बहुमूत्रता की विकृति में लाभ होता है।
  2. अनार के छिलकों को छाया में सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्णसुबह और 3 ग्राम चूर्ण शाम को जल के साथ सेवन करने से बार-बार मूत्र जाने की विकृति नष्ट होती है।
  3. प्रतिदिन दो केले खाने से बहुमूत्रता की विकृति नष्ट होती है।
  4. दो छुहारे 300 ग्राम दूध में उबालकर, छुहारे खाकर दूध पीने से बार-बार मूत्र त्याग करने की विकृति से मुक्ति मिलती है।
  5. 50 ग्राम भुने हुए चने छिलके हटाकर गुड़ के साथ खाने से बहुमूत्रता की विकृति का निवारण होता है।
  6. 10 ग्राम तिलों को पीसकर 50 ग्राम गुड़ में मिलाकर प्रतिदिन खाने से बहुमूत्रता की विकृति में बहुत लाभ होता है।
  7. पालक के 25 ग्राम रस में थोड़ी-सी मिसरी मिलाकर शाम को सेवन करने से रात्रि में बार-बार मूत्र त्याग के लिए उठने की विकृति नष्ट होती है।
  8. जीरा, जायफल और काला नमक 2-2 ग्राम मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर अनन्नास के 100 ग्राम रस के साथ सेवन करें।
  9. कुछ दिनों तक निरंतर भोजन के साथ मेथी की सब्जी खाने से बहुमूत्रता की विकृति नष्ट होती है। 3 ग्राम मेथी का चूर्ण प्रातः और सायं जल के साथ सेवन करने से भी बहुमूत्रता की विकृति नष्ट होती है।
  10. आंवले के 10 ग्राम में थोड़ा-सा मधु मिलाकर पीने से बहुमूत्रता की विकृति नष्ट होती है।
  11. रूमी मस्तगी, दालचीनी, शक्कर तीनों का समान मात्रा में चूर्ण बनाकर3 ग्राम की मात्रा से सुबह-शाम गर्म जल के साथ लें। एक सप्ताह में ही बहुमूत्र की शिकायत दूर हो जाएगी।
  12. खसखस के दाने 20 ग्राम व गुड़ 20 ग्राम मिलाकर रख लें। 1-1 गाम सुबह-शाम जल से सेवन करने से बहुमूत्र रोग ठीक हो जाता है।
  13. काले तिल व पुराना गुड़ समभाग में लेकर 1-1 गाम की गोलियां बना लें। 1-1 गोली का दिन में तीन बार सेवन करें।
  14. मिश्री 40 ग्राम, मुलहठी 30 ग्राम, काली मिर्च 20 ग्राम लेकर सभी को कूट-पीसकर चूर्ण बनाए। इस चूर्ण को 4 ग्राम की मात्रा में घी में मिलाकर सुबह-शाम चाटें। एक सप्ताह में ही बहुमूत्र ठीक हो जाएगा।
  15. काले तिल 40 ग्राम, अजवायन 20 ग्राम मिलाकर बारीक पीस लें। फिर इसमें 60 ग्राम गुड़ मिलाएं। इस योग को 6-6 ग्राम खाएं। बहुमूत्र नाषक यह अत्यंत लाभप्रद नुस्खा है। (छोटे बच्चे जो बिस्तर पर पेषाब करते हैं, उनके लिए यह परम उपयोगी है।)
  16. रीठे की गुठली का चूर्ण आधा-आधा ग्राम सुबह-शाम ताजे पानी के साथ सेवन करने से बहुमूत्र रोग एक सप्ताह में ही ठीक हो जाता है।
  17. एक लीटर पानी में 30 ग्राम बिनौला डालकर उबालें, जब तीसरा भाग बाकी रहे तो उसमें 20 ग्राम मिश्री डालकर पियंे। इससे शीघ्र आराम मिलेगा।
  18. बरगद की छाल का काढ़ा बनाकर पिये इससे शर्तिया लाभ होगा।
  19. घी के साथ कुटी हुई काली मिर्च खाना बहुमूत्र रोग के लिए अचूक औषधि है।
  20. रात्रि के समय पानी में फालसे की छाल कूटकर भिगो दीजिए। प्रातःकाल मलकर छानकर पीने से शीघ्र लाभ होता है।
  21. 10 ग्राम लसोढ़े की कोंपल का अर्क निकालें और उसमें 10 ग्राम बूरा डालकर पियें। यह बहुत लाभप्रद दवा है।
  22. यदि पेशाब बार-बार आता हो तो 50 ग्राम भुने चने लेकर चबाइये ऊपर से 100 ग्राम गुड़ खाइये। एक सप्ताह में ठीक हो जाएगा।
  23. यदि सोते समय पेशाब निकल जाता हो तो आटे में थोड़ी कबूतर की बीठ मिलाकर रोटी पकाकर खाएं। इससे सोते समय पेशाब नहीं निकलेगा।
  24. जिन लोगों को बार-बार पेशाब आता है उन्हें पालक की भुर्जी बनाकर रात को तथा सुबह खानी चाहिए। सात दिन में यह रोग जाता रहेगा।
  25. कच्चे 4-5 आंवले लेकर उनका रस निकालकर थोड़ी चीनी या नमक मिलाकर दो घंटे के पश्चात् पीते रहने से पेशाब ठीक तरीके से आना शुरू हो जाता है।
  26. एक केला आंवले के रस के साथ दिन में चार बार सेवन करने से बार-बार पेशाब आना रूक जाएगा।
  27. पांच ग्राम अनार के सूखे छिलकों को पानी में 3 बार कर हर चार घंटे के पश्चात् सेवन करने से बार-बार पेशाब आना ठीक हो जाता है।
  28. बार-बार पेशाब रोगी को दिन में तीन बार एक-एक छुआरा खिलाने से शीघ्र ही पेशाब ठीक तरीके से आने लगता है।
  29. 100 ग्राम भुने हुए चने खाकर ऊपर से थोड़ा सा गुड़ दिन में तीन बार खाने से पेशाब का बार-बार आना रूक जाता है।
  30. बार-बार पेशाब आने वाले रोगियों को तिल और गुड़ मिलाकर खिलाने से आराम मिलता है।
  31. अजवाइन और तिलों को मिलाकर अच्छी तरह से बारीक कूट फिर दो-दो चम्मच दिन में चार बार रोगी को खिलाए तो दस दिन के अंदर रोगी ठीक हो जाएगा
  32. बार-बार पेशाब रोगी को दो-दो घंटे के पश्चात् अंगूरों का रस पिलाते रहने से यह रोग ठीक हो जाता है।
  33. अनार का रस भी बार-बार पेशाब आने के रोग में काफी लाभदायक है।