Navjat Shishu Ki Dekh Bhal-After Pregnancy

Navjat Shishu Ki Dekh Bhal hindi

Navjaat Shishu Ki Dekhbhal

Navjat shishu Ki Dekhbhal Kaise Kare?

एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देना ही माँ की सबसे बड़ी संतोषजनक बात है गर्भस्थ शिशु जो अपने माँ के अंगो से एक जटिल संपर्क द्वारा अपना जीवन व्यतीत करता है, जन्म के कुछ समय के बाद अपने आपको इस संसार में रहने के लिए तैयार कर लेता है यह प्रकृति की एक रहस्यभरी कहानी है. प्रसव के बाद बच्चे के पहली सांस के साथ ही उसके अतरिक्त अंगों मेंर भारी परिवर्तन होने लगते है गर्भ की अवस्था में शिशु के फेफड़ों के वायु नाम मात्र भी नहीं होती है. लेकिन जन्म के बाद फेफड़ों द्वारा जीवनदान देती है. शिशु गर्भाशय के एक अदभुद संसार से निकल कर इस दुनिया में रहने के लिए समर्थ होता है ऐसे वातावरण में पनपने के लिए उसे माँ का प्यार तथा उसकी मदद की आवश्यकता होती है अगर यह आपका पहला बच्चा है, तो आपको उसे सँभालने में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है जन्म के बाद बच्चे को उल्टा करके अवश्य थपथपाये ऐसा करने से ही उसे ठीक प्रकार साँस आती है बुखार होने पर इंजैक्शन लगवाते समय सावधानी बरतें बच्चे का हाँथ पैर हिले नहीं तथा हर बार नयी डिस्पोजल सिरिंज का ही प्रयोग करें

Navjat Shishu Ki Dekhbhal Ka Tarika – शिशु के देख भाल कैसे करे?

Navjat Shishu Ki Grabh- Naal Ki Dekhbhal गर्भनाल की देखभाल

नाभि में लगी गर्भनाल के हिस्से को स्वच्छ तथा सूखा रहना चाहिए इसे पट्टी आदि से बांधकर ढकने की अपेझा खुला रहना ही ठीक है नाभि के आस पास रंगहीन स्परिट से साफ़ करके संक्रमण से बचाने के लिए एंटीबायोटिक पाउडर.नीबासल्फ या खूनी सर्जिकल छिड़क देना चाहिए गर्भनाल सामान्य रूप से स्वयं सूखकर नाभि से किसी प्रकार की सूजन या मवाद आने लगे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए

Navjat Shishu Ka Rang & Twacha बच्चे का रंग व त्वचा
जन्म के समय बच्चे की त्वचा का रंग हल्का गुलाबी होता है जन्म के समय बच्चे की त्वचा एक सफ़ेद चिकने पदार्थ से ढकी रहते है जिसे वर्निवस कहते है वह त्वचा को सुन्दर बनाये रखने में मदद करता है जन्म के बाद शिशु के शरीर को मौसम के अनुसार चादर या तौलिये अथवा कम्बल आदि में ढककर माँ को प्यार हेतु गोद में दे देना चाहिए बच्चे को बिस्तर पर लिटाते समय सिर थोड़ा नीचे करके ही लिटाना चाहिए नवजात शिशु को अपने शरीर का ताप सामान्य बनाए रखने में कठिनाई होती है इसलिए प्रसव के कमरे में सामान्य तापमान बना रहना चाहिए कमरे का ताप २२’ सेंटीग्रेड ७२ फ़ारनहाइट के करीब रखना चाहिए बच्चे को मौसम के अनुसार उपयुक्त वस्त्र पहनाने चाहिए

Nav-Jat Shishu Ki Janch नवजात शिशु की जाँच
प्रसव के तुरंत बाद डॉक्टर बच्चे की साँस,त्वचा का रंग तथा रोने की आवाज पर कड़ी निगाह रखते हैं समय मिलने पर डॉक्टर बच्चे की शारीरिक जाँच भी करते है इस जाँच का ध्येय बच्चे में विभिन्न अंगो की कार्य प्रणाली देखने के साथ .साथ पैदायशी कमियों को पहचानना भी है इसके अंतर्गत बच्चे के सिरके ऊपर फैंटेनेल आँख एनाक एकान एमुँह हृदय एकूल्हे के जोड़ पैर वृक्क कोषों जनन अंगो तथा मॉल मूत्र आदि का अध्धयन किया जाता है

Navjat Shishu Kaise Nahlaye?
स्नान करना

जन्म के ५.६ घंटे बाद बच्चे को मौसम के अनुसार हलके पानी से नहलाना चाहिए इसके लिए अधिक प्रभावशाली साबुन या डिटर्जेंट का प्रयोग न करें बल्कि विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाये गए साबुन का ही प्रयोग करें नहलाने के बाद स्वच्छ एमुलायम एसूती कपडे का प्रयोग करना चाहिए

Navjat Ka Pahla Stan-Paan पहला स्तनपान
पहला स्तनपान कब करना चाहिए इसको लेकर भी अनेक धारणाएं है लेकिन यह सभी जानते है की माँ का दूध सर्वोत्तम होता है बच्चे को जल्द से जल्द माँ का मीठा गाढा दूध जल्द से जल्द मिलना चाहिए बच्चे को ४.६ घंटे से ज्यादा भूखा नहीं रखना चाहिए है हो सकता है शुरू में बच्चा स्तन को ठीक से चूस न पाए लेकिन जल्दी ही वह ऐसा करने में सफल हो जाता है यदि बच्चा ऑपरेशन से पैदा हुआ है तो माँ बेहोशी की हालत से बहार आते ही स्तनपान जरूर कराएं जरुरत पड़ने पर उबला ठंडा पानी चकममच द्वारा दिया जा सकता है याद रखें बोतल से दूध य पानी कदापि न पिलाये क्योंकि यदि उससे बोतल की आदत पद जाती है तो फिर वह स्तनपान में रूचि नई लेगा

Navjat Shishu ka wajan& lambai वजन तथा लम्बाई
बच्चे के पूर्ण विकास के ज्ञान के लिए जन्म के बाद उसकी लम्बाई तथा वजन मापा जाता है जन्म के समय बच्चे का वजन ६.७ पौंड ३ण्३३० किलोग्राम तथा लम्बाई १९.२० इंच होती है प्रारम्भ के ३.४ दिनों में बच्चे का वजन ६.७ औंस ;१२०.१८० ग्राम द्ध कम हो जाता है इसके बाद फिर उसके वजन में बृद्धि होती है
बच्चे के वजन तथा लम्बाई के साथ .साथ सिर के आकर उम भी बृद्धि होती है पहले ६ माह में मस्तिष्क की तीव्र बृद्धि होने के कारण सिर बड़ा हो जाता है जन्म के समय सिर की अस्थियाँबड़ी मुलायम होती है इसीकारण बच्चे को एक ही स्थिति में अक्सर लिटाये रखने से उस तरफ का सिर चपटा हो सकता है इसलिए शरीर को सामान्य बनाये रखने के लिए बच्चे की स्थिति बदलते रहना चाहिए

Nav-jat shishu ki harkaten शिशु की हरकतें

बच्चा पैदा होते ही कुछ हरकतें स्वयं ही सीख जाता है सभी हरकतें उसके इस वातावरण में रहने के लिए आवश्यक है प्रारम्भ में बच्चे की दोनों मुठ्ठियाँ बंद रहती हैं उन्हें खोलने पर वह जोर से बंद करने की कोशिश करता है होठों से ऊँगली या निप्पल लगाने पर वह उससे चूसने की कशिश करता है तथ बातचीत करने पर मुस्कराने लगता है

Navjaat Shishu Ki Ankho Ki Jaankari आँखों की जानकारी

बच्चा जन्म के बाद से ही देख सकता है लकिन उसे समझने के लिए समय लगता है एक या दो सप्ताह बाद ही वह माँ के चेहरे को पहचानने लगता है ६ सप्ताह के बाद ही अपनीं आँखों को माँ के चेहरे के साथ घुमा सकता है शुरू में बच्चा अपनी आँखों को एक चीज पर स्थिर नहीं कर सकता इस कारण उसकी आँखे कुछ हिलती नजर आतीं है आँखों की गति पर पूरा नियंत्रण ६-१२ महीनों में आ जाता है एक वर्ष बाद अगर आँखों में तिरछापन हो तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए पहले ४ महीने में रोने पर बच्चे की आँखों से आंसू नहीं आते

Navjat shishu Me Peelapan बच्चे में पीलापन

जन्म के करीब ३. दिन बाद बच्चे की त्वचा कुछ पीले रंग की दिखाई देने लगती है इसे जॉन्डिस कहते है यह कुछ हद तक सभी बच्चो को हो जाती है मामूली जॉन्डिस सामान्य तथा स्वाभाविक है और २.३ सप्ताह में स्वयं ठीक हो जाती है अगर पीलापन बढ़ने लगे तो डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए

Navjaat Shishu Ki Dekhbhal se judi Kuch Jaruri Baate कुछ जरुरी बातें

कुछ जरुरी बातें
कुछ नवजात शिशु जन्म के बाद पहले दिन बाद दो. तीन बार उल्टी करते है यहाँ थोड़ी.थोड़ी उल्टी शिशु पेट में गर्भाशय का निगला हुआ तरल पदार्थ बहार निकलने के लिए ही करता है सामान्यतः ये उल्टियां स्वयं ही रुक जाती हैं
कभी.कभी लड़का.लड़की दोनों में ही स्तन कुछ उभरे हुए दिखाई देतें हैं एऔर कुछ बून्द दूध भी निकल सकता है यह बच्चे के शरीर में हार्मोन्स के कारण होता है और स्वयं ही ठीक हो जाता है अगर स्तन की सूजन लाल या दर्द्युक्त हो जाये तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
अगर आपका बच्चा संभावित तिथि से पहले पैदा हो जाये या गहरी जॉन्डिस हो जाये तो उसे कांच व प्लास्टिक से बनी एक विशेष मशीन में कुछ दिनों तक रखा जाता है इसे इंक्यूबेटर कहते है यह बच्चे के ताप को सामान्य बनाये रखने में काफी मदद करती है इसके द्वारा अन्य शारीरिक क्रियाओं पर भी निरन्तर निगाह राखी जा सकती है