Muli (Radish) Se Rogo Ka Upchar- मूली खाने के फायदे

Radish 64 Benefits

Muli (Radish ) Benefit Hindi – एक बहुत उपयोगी और औषधि के गुण रखने वाली शाक वर्ग की चीज है। जिसका उपयोग सामान्यतः सलाद और तरकारी के रूप में किया जाता है। मूली शीत ऋतु में उगने वाली शाक है। मूली छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती है। यह अलग-अलग आकार की होती है तथा सारे भारत में पैदा होती है।  मूली धरती के नीचे पौधे की जड़ होती है। धरती के ऊपर रहने वाले पत्ते, मूली से भी अधिक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, अतः मूली के साथ इसके पत्तों का भी सेवन करना चाहिए। मूली के पौधे में आने वाली फलिया ‘मोगर’ भी समान रूप से उपयोगी और स्वास्थ्यवर्द्धक है। छोटी मूली, चरपरी, गर्म और त्रिदोषनाषक है। सामान्यतः लोग मोटी मूली पसन्द करते हैं।  इसे संस्कृत में मूलक, हिन्दी में मूूली, मराठी में मुला, बंगला में चणक मूली, गुजरात में मुला, तेलुगु में मूलंगी चेट्ट, तामिल में मुलाजी, कन्नड में मुलंगी, फारसी में तुख, तुर्ब तथा अंग्रेजी में रेडिष कहते हैं। इसका लैटिन नाम रेफेनस सेटिवस है।  बड़ी मूली रूखी, गर्म, भारी और त्रिदोष कारक मानी गई है। परन्तु तेल में पकाई गई मूली त्रिदोषषामक होती है। छोटी मूली रूचिकारक हल्की, पाचक, स्वर को उत्तम करने वाली, गर्म, चरपरी, ज्वर, श्वांस नासिका रोग, कंठ रोग और नेत्ररोग नाषक होती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से छोटी और पतली मूली ही उपयोगी है। भोजन के साथ एक कच्ची मूली प्रतिदिन खा लेने से व्यक्ति अनेक बीमारियों से मुक्त रह सकता है।  मूली की जड़ में आर्दता 94.4 प्रतिषत, प्रोटीन 0.4 प्रतिषत, वसा 0.1 प्रतिषत, सूत्र 0.8 प्रतिषत, कार्बोहाइड्रेट 3.4 प्रतिषत, खनिज दªव्य 0.6 प्रतिषत, कैल्षियम 50 मिग्रा, फास्फोरस 22 मिग्रा. व लौह 0.4 मिग्रा. प्रति 100 ग्राम पाए जाते है। यह विटामिन ‘सी’ का उत्तम स्त्रोत है। इसमें विटामिन ‘ए’, ‘बी’ और ‘सी’ होता है। मूली में प्रोटीन, कैल्षियम, गंधक, आयोडीन तथा लौह ततव पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इसमें सोडियम, फास्फोरस, क्लोरीन तथा मैग्नीषियम भी होता है।  यद्यपि मूली का रंग सफेद है लेकिन यह शरीर को लालिमा प्रदान करता है। मूली और इसके पत्ते भोजन को ठीक प्रकार से पचाने में सहायता करते है।

Radish 64 Benefits

muli khane ke fayde

Muli Radish Benefits In Hindi

1- मूली हमारे दांतों को मजबूत करती है तथा हड्डियों को शक्ति प्रदान करती है। मूली शरीर से विषैलीगैस कार्बन डाइ आक्साइड को निकालकर जीवनदायी आक्सीजन प्रदान करती है। मूली भोजन को पचाने वाली व उदर विकार दूर करने वाली, बवासीर व हृदय रोग को शांत करने वाली, रक्तचाप को नियन्त्रित करने वाली होती है।

2- जिगर, तिल्ली, आंतों के रोग, गुर्दा, पीलिया आदि रोगों में मूली का सेवन लाभदायक है। इससे व्यक्ति की थकान मिटती है और अच्छी नींद आती है।

3- मूली के खाने से पेट के कीडे नष्ट होते हैं तथा पेट के घाव ठीक होते है। अफारे में मूली के पत्तों का रस विषेष उपयोगी है।  मूली का उपयोग रसोइघर में प्रायः पराठें, अचार, रायता, तरकारी तथा भुजिया जैसे स्वादिष्ट व्यंजन बनाने में किया जाता है, परन्तु सबसे अधिक लाभदायक कच्ची मूली होती है। यह हमारे शरीर की अनेक बीमारियों को दूर करती है। मूली के औषधीय उपयोग निम्न है-

4- मोटापा-मूली के रस में, थोड़ा सा नमक और नींबू का रस मिलाकर, नियमित रूप से पीने से मोटापा कम होता है और शरीर सुडौल बनता है।

 

5- मूली के बीज का 1 चम्मच चूर्ण, सुबह-षाम पानी के (गर्म) साथ लेने से रूका हुआ मासिक धर्म होने लगता है।

6-  5 चम्मच मूली के बीज कूटकर, 2 गिलास पानी में उबालें, पानी जब 1 गिलास रह जाये तो छानकर 2 बार गर्म पीने से बन्द मासिक आ जाएगा।

7-  रोजाना प्रातः आधा कप मूली का रस पीयें व शाम को 75 ग्राम गुड़ व 50 ग्राम साबुत धनिया 1 गिलास पानी में उबालकर आधा पानी रहने पर छान कर पीयें।

8-  2 चम्मच मूली के बीज, 2 चम्मच काले तिल कूट कर 1 गिलास पानी में उबालें, आधा रहने पर छानकर सुबह-षाम पीयें।

9- पेषाब में जलन व रूकावट दूर करने के लिए मूली का रस पीयें व मूली के बीज का चूर्ण 1-1 चम्मच साथ में लेवें।

10- आधा चम्मच मूली के बीज पीसकर 1 गिलास पानी में मिलाकर, चैथाई कप मूली का रस मिलाकर, छानकर दिन में 3 बार पीयें, पेषाब खुलकर आएगा।

11- मूली के पत्तों का रस 4 तोला में 3 माषा अजमोद का चूर्ण डालकर सुबह-षाम पीने और इसके बीज का चूर्ण 1 चम्मच लेने से पथरी गलकर मूत्र से निकल जाती है।

12- मूली के पत्ते चबा-चबाकर खाने या मूली का रस 3-4 चम्मच नित्य पीने से 2-3 माह में पथरी पेषाब के रास्ते निकल जाएगी।

13- मूली के रस में थोड़ा सा नमक डालकर पीने से पेटदर्द दूर होता है। मूली के रस में पिसी कालीमिर्च व नमक मिलाकर पीने से दर्द मिट जाता है।

14- मूली के पत्ते चबाने से हिचकी तुरंत बंद हो जाती है। बिच्छू दंष-मूली के टुकड़े पर नमक डालकर, दंष स्थान पर रखने से वेदना शान्त हो जाती है। विषैले कीट के काटने पर मूली का टुकड़ा काटे स्थान पर रगड़े या रस लगाएं, रस पिलाएं, विषैले दंष का प्रभाव नष्ट हो जाएगा।

15- 125 ग्राम मूली के पत्तों के रस में 30 ग्राम चीनी मिलाकर प्रातः पीने से तुरन्त लाभ होना शुरू हो जाता है।

16- छोटे पत्तों सहित ताजा मूली प्रातः नियमित खाने से कुछ ही दिनों में पीलिया ठीक हो जाता है।

17- 3 चम्मच मूली के पत्तों का रस व 1 चम्मच तिल्ली या सरसों का तेल मिलाकर आंच पर गर्म करें, जब केवल तेल शेष रह जाए तब उतार लें। इस तेल की 2-2 बूंद कान में डालने से कान दर्द दूर होता है तथा कान की खुजली ठीक होती है।श्वास कष्ट- मूली के टुकड़े 1 गिलास पानी में उबाल कर पीने से श्वास कष्ट व हिचकी में आराम होता है।

18- मूली के बीजों के नीबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होती है।

19- मूली के बीज, मूली के रस में पीसकर लगाने से सभी प्रकार के दाद ठीक हो जाते है।

20- गाजर व मूली का रस समभाग मिलाकर, एक गिलास रस नित्य 3 बार पीयें।

21- मूली को काटकर, नमक लगाकर, रात को ओस में रख दें, प्रातः खाली पेट खाएं।

22- हल्दी के साथ मूली खाने से बवासीर में लाभ होता है।

23- मूली के पत्ते छाया में सुखाकर पीस लें और समभाग शक्कर मिला लें। इसमें से 1-1 चम्मच चूर्ण सुबह-षाम, पानी के साथ 45 दिन लेने से बवासीर ठीक हो जाती है।

24- मूली के 2 चम्मच रस में 2 चम्मच गाय का घी मिलाकर लेने से लाभ होता है।

25- 1 कप मूली के रस में चैथाई चम्मच सेंधा नमक मिलाकर प्रातः रोजाना पीएं।

26- आधा कप मूली का रस 1 गिलास में मिलाकर गुदा धोयें।

27- प्रतिदिन मूली के टुकड़ों पर चीनी डालकर 1 बार प्रातः खाते रहें।

28- रक्ताल्पता-मूली के रस में समभाग अनार का रस मिलाकर पीने से रक्ताल्पता का रोग दूर होता है।

29- खट्टी डकारें- मूली के रस में मिश्री मिलाकर पीने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिलता है।

30- खांसी और दमा- सूखी मूली का काढ़ा बनाकर, उसमें जीरा और नमक डालकर पीने से राहत मिलती है।

31- तिल्ली- मूली के पत्ते, मूली और जमीकन्द के कुछ टुकड़े एक सप्ताह तक कांजी में डाले तथा उसके बाद उसके सेवन से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक होती है।

32- दाद-मूली के बीज, गंधक, आमलसार, गूगल 20-20 ग्राम, नीला तूतिया 1 ग्राम बारीक करके, आधा पाव पानी में घिसकर रख लें। दाद पर लगाएं, कुछ दिन में दाद ठीक हो जाएगा।

33- पेट संबंधी रोग-1 कप मूली के रस में 1 चम्मच अदरक का रस और 1 चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित सेवन से भूख बढ़ती है और पेट सम्बन्धी सभी रोग नष्ट होते हैं।

34- प्रदर रोग- मूली का रस नित्य 2 बार पीने से प्रदर स्त्राव बन्द होता है।

35- मधुमेह- प्रातः भोजन से पूर्व पेट भर मूली खाने या रस पीने से पेषाब में आने वाली शुगर बन्द हो जाएगी।

36- सौन्दर्यवर्द्धक-मूली के प्रतिदिन सेवन से रंग निखरता है, खुष्की दूर होती है, रक्त शुद्ध होता है और चेहरे की झाइयां, कील-मुंहासे आदि साफ होते है।

40- गर्भपात-मली कच्चे कोमल पत्ती सहित काटकर, कम से कम पानी में उबालें। उबलने पर बिना मसाला डाले, रोजाना दिन में 3 बार जितनी खा सके खाते रहें। बार-बार होने वाले गर्भपात में लाभ होता है।

41- चर्मरोग-मूली के बीजों को उसके पत्तों के रस में पीसकर लेप करने से चर्म रोगों से मुक्ति मिलती है।

42- दर्द गुर्दा-कलमीषोरा 15 ग्राम, मूली का रस 125 मिली. में खरल कर चने के आकार की गोली बनाएं।

43- 1 गोली सुबह-षाम पानी के साथ खायें। कब्ज-कच्ची मूली पत्तों सहित खाने से कब्ज दूर होती है।

44- गले की सूजन- 1 गिलास मूली के रस में एक चुटकी सेंधा नमक डालकर गर्म कर, गुनगुने रस से गरारे करने से गले की सूजन, घाव तथा दर्द में आराम होता है।

45- तिल्ली- मूली के टुकड़े 15-20 दिन के लिए सिरका में डाल दें। दिन में 3 बार सेवन करने से तिल्ली घुल जाती है।

46- पायरिया- मूली पर काली मिर्च डालकर खाने से पायरिया में लाभ होता है। 1 गिलास पानी में 4 चम्मच मूली का रस मिलाकर कुल्ले करें।

47- हिचकी- मूली के टुकड़े 1 गिलास पानी में उबालकर पीने से हिचकी औश्र श्वास कष्ट में लाभ होता है।

48- वात प्रकोप- मूली का 1 इंच का टुकड़ा काटकर 2-3 पत्तों के बीच का हिस्सा लेकर खाली पेट चबा-चबाकर खाएं, आधा घण्टे बाद एक फुलका पानी के साथ खाएं। इससे वात प्रकोप दूर होता है।

49- दर्द- मूली खाने से मांसपेशियों का दर्द दूर होता है।

50- नकसीर- मूली पर नींबू का रस डालकर रोजाना खाने से बार-बार का नकसीर आना बंद हो जाता है।

51- नेत्ररोग- मूली का रस निकालकर कुछ देर रखें। अब निथारकर शीशी में भर लें। इसकी 2-3 बूंद आँख में डालने से जाला, फूला, धुंध आदि नेत्र रोग ठीक हो जाते है।

52- अनिद्रा- प्रातः मूली शाम को प्याज व रात को सोते समय सेब खाये और खाने के बाद 2 घंटे तक पानी नही पीयें।

53- फोड़े-फुंसी खुजली- जहां खुजली चलती हो मूली घिसकर लेप करें या मूली का रस लगाएं। एक घण्टे बाद बिना साबुन के धोयें। साथ ही मूली का सेवन करते रहें।

54- हड्डियों को मजबूती- उठते-बैठते समय हड्डियों कड़कती हों, कमजोर हो या टेढ़ी-मेढ़ी होती जा रही हो तो 1 कप मूली का रस रोजाना पीने से हड्डियां मजबूत हो जाएंगी।

55- रतौंधी- पालक औश्र मूली का र समान मात्रा में मिलाकर, सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।

56- धातुस्त्राव- 1 कप मूली का रस प्रातः नित्य नींबू डालकर पीयें या मूली खायें।

57- मर्दाना शक्तिवर्द्धक- नित्य मूली पर नींबू का रस डालकर खायें। जब मूली न हो तब मूली के बीज पीसकर 1 चम्मच दिन में दो बार दूध की मलाई के साथ खायें।

58- गंजापन- सिर में जहां बाल उड़ गये हों मूली का रस लगाएं। इससे बाल उग आते है व सिर के बाल बढ़ते है।

59- आग से जलना- जले हुए अंग पर मूली पीस कर लेप करें, जलन दूर होगी। शराब का नशा- ज्यादा शराब पी ली हो तो 1 कप मूली का रस पिला दें, नशा शीघ्र उतर जाएगा।

60- कूकर खाँसी- मूली और शलजम काटकर नित्य खाने से काली खांसी में लाभ होता है।

61- गला बैठना- सर्दी के कारण गला बैठ गया हो तो मूली के बीज कूटकर इसकी आधा चम्मच मात्रा, गर्म पानी से लेवें तथा गुनगुने पानी से गरारे करें। कुछ ही दिनों में गला साफ हो जाएगा व आवाज सुरीली हो जाएगी।

62- जोड़ों का दर्द- मूली के पत्ते बारीक काट कर पानी में उबाल लें और भाप से सेंक करें। अन्त में उस पानी में कपड़ा भिगोकर सेंक करें। दर्द में लाभ होगा। मुंहासे- प्रातः एक मूली खाने से मुंहासों में लाभ होता है।

63- बवासीर- 20 ग्राम रसौत को मूली खोखली करके उसमें भरकर, मुंह बंद करके उपलों की आग पर भस्म कर लें। दूसरे दिन रसौत निकालकर, मूली के रस में बेर के बराबर गोलियां बनायें। 1-1 गोली सुबह-शाम पानी के साथ खायें। गर्म चीज का परहेज करें।

64- पथरी- 35 ग्राम मूली के बीज, आधा लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये, छानकर पीयें। कुछ दिनों के प्रयोग से मूत्राशय की पथरी गलकर निकल जाती है।