masudo ka cancer

Masudo Ka Cancer

मसूड़ों का कैंसर
मसूड़ों के कैंसर में निचले मसूड़ों का कैंसर ऊपरी मसूड़ों के कैंसर की तुलना में अधिक होता है। इस प्रकार का कैंसर वृद्धावस्था में अधिक होता है तथा 40 वर्ष से कमकी अवस्था के व्यक्तियों में बहुत कम होता है।

Masudo Ka Cancer Karan –

कारण- -कृत्रिम दाँतों का मसूड़ों में ठीक से फिट न होना है। -मसूड़ों में उत्पन्न व्रण।-दाँतों में कीड़े लगना। -सिफिलिस। -तमाकू को चूसने के रूप में अधिक सेवन तथा सुघनी आदि का अधिक प्रयोग। लक्षण- मसूड़ों के कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों में मसूड़ों से भोजन चबाते समय रक्तस्त्राव होता है। साथ ही कृत्रिम दातों के फिट होने में बाधा होती है। मसूड़ों में विशेषकर पीछे के दाँतों के मसूड़ों में तथा दाँतों के चारो ओर व्रण दिखाई देता है। इसके अतिरिक्त कर्णार्ति, हनुस्तंभ, रक्तस्त्राव, तीव्रशूल आदि लक्षण होते हैं।  रोगी की परीक्षा करने में रुग्ण मसूड़े रबड़ के समान फूले दिखाई देते हैं, जो प्रायः क्रमशः मसूड़ों के संपूर्ण भाग को प्रभावित कर देते हैं। जब कैंसर का प्रसार होने लगता है। तब गै्रव लसिका ग्रंथियाँ भी सूज जाती है।- रोगी की मृत्यु अत्यधिक रक्तस्त्राव, ब्राकोन्यूमोनिया आदि उपद्रवों के परिणामवरूप होती है। रोग की पहचान- मसूड़ों की विधिवत् परीक्षा, पूर्ण इतिहास, जिसमें दाँतों का कीड़ा लगना, सिफिलिस, दाँतों को उखाड़ने के बाद उत्पन्न उपद्रवों, मसूड़ों की हाथ से परीक्षा, बायोप्सी परीक्षा मेंडीबल और मैक्सीला की एक्स-रे परीक्षा (शोथ के चिन्हों का मिलना) आदि परीक्षणों के आधार पर रोग की पहचान होती है।

Masudo Ka Cancer Treatment

चिकित्सा- प्रारंभिक अवस्था में विकिरण चिकित्सा से रोग निर्मूलन हो जाता है। यह चिकित्सा अभी तक लाभकारी होती है। जब तक कैंसर का आकार 3 सेमी. व्यास का होता है। नोट-क्यूरीचिकित्सा भी लाभकारी होती है। रेडियमथेराॅपी उसी अवस्था में करनी चाहिए जब कैंसर का आकार सूक्ष्म हो।

Masudo Ke Cancer Ki Shalya Chikitsa-

शल्यचिकित्सा का मुख्य उद्देश्य मेंडीबल को सुरक्षित रखना होता है। यह चिकित्सा तभी तक अपेक्षित रहती है, जब तक कैंसर मसूड़े तक ही सीमित रहता है। इससे अधिक कैंसर के प्रयास होने पर मेंडीबल को निकाल दिया जाता है और उस स्थान पर बोन ग्राफिंटग कर दी जाती है। जब कैंसर लसिका ग्रंथियों तक प्रसारित हो जाता है। तब स्थानिक लसिका ग्रंथियों तथा अधःहनु (मेंडीबल) को भी साथ-साथ निकाल दिया जाता है।  शल्यचिकित्सा के उपरांत अधिक वोल्टेज के एक्स-रे तथा कोबाल्ट चिकित्सा करने से रोग का प्रसार रूक जाता है।

Masudo Ka Cancer Ki Ayurvedic Treatment

आयुर्वेदिक अनुभूत चिकित्सा–इस चिकित्सा में सबसे पहले पंचकर्मों के द्वारा दोषों की शुद्धि की जाती है। इसके पश्चात् रोगी के आंतरिक मुख का प्रक्षालन किया जाता है।

  • प्रक्षालन के लिए- लाक्ष्यादि तैल, दूरिमेदाद्रय तैल, वकुलाद्य तैल के गरारे से मसूड़ों के समस्त प्रकार के रोग निर्मूल हो जाते हैं।-बरगद, पीपल, अंजीर, आम, जामुन, बबूल की छाल तथा रेड, अमरूद, नारियल, सुपारी, कुरूची तथा कदंब की जड़ की छाल- प्रत्येक 10-10 ग्राम लेकर 8 लीटर पानी में उबालते हैं। 2 लीटर पानी शेष रहते उतारकर छान लें। उक्त जल से मुख प्रक्षालन करने से मुख की बदबू तथा दंतक्षय दूर होते हैं।masudo ke cancer gharelu nuskhe
  •  नीम की छाल, दारूहरिद्रा तथा रंसाजन और इंद्रयव के काढ़े को शहद के साथ लेने से मुख के कैंसर में लाभ होता है। -रोगी को प्रातःकाल ‘माणिक्य रस’ की 10 बूँद शुद्ध घी तथा 20 बूँद शहद के साथ मिलाकर सेवन कराते हैं। पंचातिक्त घृत गुगगुल सायं 5 बजे गुनगुने पानी के साथ देते हैं। महाभल्लातक सायं 7 बजे चीनी के शर्बत के साथ तथा खदिरारिष्ट दिन में 2 बार भोजनोपरांत और महालक्ष्मी विलास (स्वर्णयुक्त) रात्रि 10 बजे शहद और गुनगुने दूध के साथ सेवन कराया जाता है।  इस औषधि व्यवस्था से मसूड़ों के कैंसर में शत-प्रतिशत लाभ होता है। कुछ महीनों की नियमित चिकित्सा से रोग पूर्णतया निर्मूल हो जाता है। masudo ke cancer desi ilaj,

सावधानी– सभी प्रकार के खट्टे फल, शीतल जल, नीम आदि की टहनियों की दातून, बिना कुटा हुआ चावल तथा ऐसे पदार्थ, जिनका चूसना कठिन होता है जैसे सुपारी आदि, इनसे रोगी को बचाना चाहिए।
मसूड़ों के कैंसर वाले रोगी के लिए उपयुक्त पथ्य-

  • -मँूग या मसूर की दाल, छोला, अरहर की दाल, शुद्ध मक्खन, चीनी तथा साठी चावल का सेवन उपयुक्त रहता है। -शालि चावल के माड़ तथा तिक्त तीक्ष्ण पदार्थों के रस से गरारा कराते हैं।