Lahsun Garlic Benefits Hindi-लहसुन खाने के 47 फायदे

Garlic Benefits Hindi

Lahsun Garlic Fayde – धरती पर अमृत तुल्य वस्तु केवल एक हैऔर वह है लहसुन। लहसुन (Garlic) का प्रयोग प्राचीनकाल से हो रहा है। पूरी दुनिया में लहसुन का प्रयोग सदियों से सब्जी, मसाले या चटनी के रूप में होता आया है। इसके अंदर एलियम नाम एंटिबायोटिक होता है जो बहुत से रोगों में लाभप्रद है। धरती पर अमृत तुल्य वस्तु केवल एक हैऔर वह है लहसुन। लहसुन का प्रयोग प्राचीनकाल से हो रहा है। पूरी दुनिया में लहसुन का प्रयोग सदियों से सब्जी, मसाले या चटनी के रूप में होता आया है। इसके अंदर एलियम नाम एंटिबायोटिक होता है जो बहुत से रोगों में लाभप्रद है।  लहसुन एक द्विवर्षी पौधा है। जिसमें दूसरे साल फूल व बीज बनते हैं। प्याज के ही परिवार के सदस्य लहसुन की जड़े रेशेदार, तना बेहद पतला व चिपटा तथा पत्तियां गूदेदार होती हैं व इन्हीं गूदेदार, चपटी व हरी पत्तियों के नीचे लहसुन की गांठ निकलती है, जिसमें करीब 20-30 छोटी गांठे या कलियां पतले सफेद आवरण द्वारा एक-दूसरे से बंधी दिखाई पड़ती है। हर कली (पूती) के चारों ओर भी सफेद शल्कनुमा आवरण मिलता है। लहसुन को उगाने के लिए खनिज पदार्थो से युक्त मिट्टी के अलावा ठंडा मौसम चाहिए।  इसे संस्कृत में रसोन, हिन्दी में लहसुन (Lahsun), मराठी में लसूण, गुजराती में लसण, बंगला में रशून, तेलुगु में तेल्लउल्ली, तामिल में बेलोई पुंडु, कन्नड में बेल्लुल्लि, फारसी में सीर तथा अंग्रेजी में गार्लिक रूट कहते हैं। इसका लैटिन नाम एलियम सटाइवम है।

आयुर्वेदानुसार लहसुन पौष्टिक, वीर्यवर्द्धक, स्निग्ध, गर्म, पाचक, दस्तावर, पाक तथा रस में कटु और मधुर है, भग्न स्थान को जोड़ने वाला, कण्ठ शोधक, भारी, पित्त व रूधिर को बढ़ाने वाला, बल, वर्ण के लिए उत्तम, नेत्रों को सुखदायक, मेघा के लिए हितकारी और रसायन है। यह हृदय रोग, जीर्ण ज्वर, पाश्र्व शूल, कब्ज, वायुगोला, अरूचि, खांसी, सूजन, बवासीर, कोढ, मन्दाग्नि, कृमि, वात, श्वास और कफ को हरने वाला होता है। पुरूष में शुक्र और ओज को बढ़ाता है तथा नारी के लिए संतानप्रद और आयु बढ़ाने वाला है।  यह गर्म प्रकृति का होता है, जिस कारण नपुंसकता दूर करने की यह एक उत्तम औषधि है। लहसुन खाने से रक्तदाब कम हो जाता है। हृदय संबंधी रोगों में लहसुन रामबाण माना जाता है। इसके सेवन से जुकाम और सर्दी ठीक होती है। गठिया जैसे रोग में लहसुन बहुत लाभदायक है। लहसुन दौर्बल्य का नष्ट करता है। लहसुन शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम करके, चर्बी और प्रोटीन को घुलनशील बनाता है।  लहसुन में प्रोटीन 6.3 प्रतिशत, शर्करा 30 प्रतिशत व तेल 0.1 प्रतिशत होता है। इनके अलावा लौहा, कैल्शियम, विटामिन ‘बी’ व ‘सी’ तथा थाइमन, नियासिन, राइबोफलेविन आदि तत्व भी पाए जाते है।  अपने गुणों के कारण लहसुन विभिन्न प्रकार के रोगों में दवा के रूप में भी लाभकारी है। इसका सेवन शीत ऋतु में अवश्य करना चाहिए। शीत और बसन्त ऋतु में कफ का शमन करने के लिए और वर्षा काल में बात का शमन करने के लिए लहसुन का सेवन करना चाहिए। पित्त का शमन करने के लिए मिश्री के साथ, कफ का शमन करने के लिए शहद के साथ तथा वात का शमन करने के लिए घी के साथ इसका सेवन करना चाहिए। इसके गुणों के कारण आयुर्वेदज्ञों ने इसे यौवन-प्रदाता की उपाधि प्रदान की है।  लहसुन का पौधा मूलरूप से यूरोप और मध्य एशिया का है। प्राचीन लेखों से पता चलता है कि लहसुन को सबसे पहले चीन में उगाया गया व चीन से ही यह सारी दुनिया में फैला। अब तो इसे संसार के सभी देशों में उगाया जाता है।

Garlic Benefits Hindi

Lahsun ke gharelu nuskhe

Lahsun Garlic Ayurvedic Treatment in HIndi –

लहसुन के औषधीय गुणयोग निम्न है-

1- मासिक धर्म विकार-  तोला लहसुन व 6 माषे गाजर के बीज कूटकर 500 ग्राम पानी में चैथाई रहने तक उबालें और 30 ग्राम पुराना गुड मिलाकर पिलाएं। मासिक धर्म खुलकर हो जाएगा।

2- दाद- पुराने लहसुन का रस दिन में 2-3 बार लगाने से शीघ्र लाभ होता है। लहसुन को जलाकर, उसकी भस्म, शहद में मिलाकर, दाद पर लगाने से दाद मिट जाता है।

3-  टी.बी.-लहसुन की 1 कली दूध में उबालकर पिलायें। लहसुन के रस में रूई की बत्ती बनाकर सूंघते रहने से फेफड़ों में जमा टी.वी. के रोगाणु नष्ट हो जाते है।

4- जोड़ों का दर्द- 4-5 कली कच्चा लहसुन प्रतिदिन खाने से जोड़ों का दर्द व सूजन खत्म हो जाती है।

5-  लहसुन की कलियों को पीसकर, सरसों या तिल के तेल में पकाकर लगाने से काफी आराम मिलता है।

6- पेट का कैंसर- लहसुन की कलियां पानी में पीसकर पीते रहने से पेट का कैंसर ठीक हो जाता है तथा जलोदर रोग ठीक हो जाता है।

7- दिल की धड़कन- यदि दिल की धड़कन अनियमित हो जाए या जी मिचलाने लगे तो लहसुन की 4 कलियां चबाकर खा जाएं। इससे शीघ्र आराम मिलता है।

8- दंतरोग- 10 ग्राम शहद में 15-20 बूंद लहसुन का रस चाटने से पायरिया, मसूड़ों में सूजन, दर्द व दाँतों की दुर्गन्ध दूर हो जाते हैं।

9- बालों में रूसी- लहसुन की 2-4 कलियां पीसकर बालों में लगाएं। कुछ ही दिनों में समस्या दूर हो जाएगी। मिरगी- लहसुन की कलियां दूध में उबालकर रोग की दषानुसार लंबे समय तक पिलाने से मिरगी रोग दूर हो जाता है।

10- नाखून- कमजोर नाखून पर लहसुन रगड़ने से नाखून मजबूत और चमकदार बनते हैं।

11- तीव्र ज्वर- लहसुन की कलियां कूटकर, उसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर, सूती कपड़े में पोटली बनाकर सुंघायें और रस पिलायें। ज्वर उतर जाएगा।

12- रक्तविकार- भोजन के बाद लहसुन की 4 कलियां नियमित सेवन करने से खून साफ रहता है। लहसुन रक्त में से अवांछित तत्वों को निकालकर शरीर को नई शक्ति देता है।

13- हार्ट-अटैक-जैसे ही दिल का दौरा पड़ने लगे तुरन्त 5-6 कलियां चबा जाएं। इससे दौरे का प्रभाव खत्म हो जाएगा। बाद में दूध में लहसुन उबालकर देते रहें। जिससे हृदय पर वायु का दबाव कम हो जाता है।

14- यौन-शक्ति के लिए- 2 चम्मच कच्चे आंवले के रस के साथ 1-2 कली लहसुन पीसकर खाने से स्त्री-पुरूष दोनों को फायदा होता है।

15- लकवा- 25 ग्राम लहसुन की कलियां पीसकर, 500 ग्राम गाय के दूध में पकावें और स्वादानुसार मिश्री मिलाकर थोड़़ा गाढ़ा कर लें। ठण्डा होने पर रोगी को खिलायें। लगभग 40 दिन खिलाने से रोग ठीक हो जाता हैै।

16- सिरदर्द- यदि वायु के कारण सिरदर्द हो तो 1-2 बूंद लहसुन का रस नाक में डालकर खींचे।

17- शुक्रदोष- गुनगुने दूध में 2 कली पिसा लहसुन लेने से शुक्र तरल नहीं होता। स्मरणषक्ति में वृद्धि- 1-2 कली लहसुन चबाकर खाने के बाद दूध पीने से रतौंधी, खुजली, कृमि, पथरी, शारीरिक कमजोरी व याददाषत कमजोर हो फायदा करता है।

18- शरीर की कमजोरी- 1-2 कली लहसुन पीसकर, आधा पाव दूध में उबालकर पीने से फायदा होता है।

19- वायु विकार- ठण्डे पानी में 5 बूंद लहसुन का रस मिलाकर पीने से आराम मिलता है। प्रातः 5-6 कलियां पानी के साथ लेने से लाभ होता है।

20- बेहोषी के दौरे- लहसुन व हींग एक कपड़े में बांधकर, बच्चे के गले में बाँधने से फायदा होता है।

21- अस्थिभंग-घी में लहसुन भूनकर, हल्दी मिलाकर, दूध से सेवन करें, तेल में निवाया गर्म करके, हड्डी बैठाकर ऊपर से बंाधे।

22- आंत्रकृमि- आंतों में बस गए कीड़ों को नष्ट करने के लिए लहसुन का टिंचर, दूध के साथ 10-20 बूंद, खाली पेट पिलाने से आंत्र कृमि नष्ट हो जाते है।

23- कुत्ते के काटने पर- लहसुन पीसकर, काटे स्थान पर लेप लगाएं तथा लहसुन का क्वाथ 7 दिन तक पिलाएं। विष का प्रभाव खत्म हो जाएगा।

24- आधासीसी का दर्द- 1. 15 ग्राम लहसुन के रस में 500 मिग्रा. हींग घोंटकर, कपड़े से छानकर, शीषी में भर लें। दर्द उठने पर 2-3 बूंद उसी तरफ की नाक में डालें 5 मिनट में दर्द मिट जाएगा।

25-  दर्द के स्थान पर पिसे हुुए लहसुन का लेप करें और दर्द की ओर के नाक में 2 बूंद लहसुन का रस डालें। कुछ देर बाद लेप धो दें क्योंकि लहसुन तीव्र दाहक होता है।

26- सर्दी-खाँसी- लहसुन की कलियाँ काटकर, सरसों के तेल में पकाकर, कंठ तथा कनपटी मेें लगाएं। 2-3 बार में ही आराम आ जाएगा।

27- उदरकृमि- 1. लहसुन का रस आधा चम्मच, थोड़ी छाछ में मिलाकर पीने से पेट के कृमि नष्ट होते हैं।

28-  लहसुन की 5-6 कली छीलकर काट लें। इन्हें 15-20 मुनक्का या शहद के साथ, दिन में 3 बार खाने से 3-4 दिन में कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

29- कान का दर्द- लहसुन पीसकर, सरसों या तिल के तेल में पका लें। इस तेल की 2 बूंद कान में डालने से दर्द दूर होता है व घाव ठीक हो जाता है तथा बहरापन दूर होता है।

30- बच्चों की खाँसी- छोटे बच्चों को लहसुन की कलियों की माला बनाकर, गले में पहनाने व छाली, गले व पीठ पर लहसुन को सरसों के तेल में उबालकर, मालिष करने से खांसी ठीक होती है।

31- श्वांस कष्ट व कफ प्रकोप में लहसुन के रस की 5-6 बूंद, शहद में मिलाकर, दिन में 3-4 बार चाटने से आराम होता है।

32- मुंहासे- लहसुन का लेप लगाने व खाने से मुंहासे दूर हो जाते है व इनका दाग तक नहीं रहता। खुजली- लहसुन का लेप लगाने से खुजली नष्ट हो जाती है।

33- घाव- एक भाग लहसुन का रस, 3 भाग पानी मिलाकर घाव को धो लें। फिर लहसुन को पीसकर घाव पर लगाकर पट्टी बांध दें। इससे घाव जल्द ठीक हो जाता है तथा दर्द भी दूर होता है।

34- काली खाँसी-  5-6 बूंद लहसुन का रस दिन में 3-4 बार लेने से काफी फायदा होता है।

35-  5-6 बादाम रात को पानी में भिगोकर, प्रातः छीलकर, लहसुन की एक कली में मिला, पीसकर खिलाएं। कुछ दिनों में भयंकर काली खांसी ठीक हो जाएगी।

36- विषैले कीट के काटने पर- लहसुन को पीसकर, त्वचा पर लेप करने से, कीडे के काटने व डंक की जलन कम हो जाती है।

37- बिच्छू दंष- काटे स्थान पर अमचूर व लहसुन पीसकर लगाएं। लहसुन को पीसकर लेप लगाने तथा 25 ग्राम लहसुन का रस व 25 ग्राम शहद मिलाकर खिलाएं। विष का प्रभाव नष्ट हो जाएगा।

38- जुएं- लहसुन पीसकर, नींबू के रस में मिलाकर रात को सोते समय सिर पर मलकर प्रातः सिर धोएं। एक सप्ताह इसके प्रयोग से रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

39- गंजापन- कुछ दिनों तक दिन में 2 बार लहसुन का रस लगाकर सूखने दें। 2-3 माह तक करने से गंजे स्थान पर बाल उग आएंगे।

40- पीलिया- 100 ग्राम गर्म दूध में, 4-5 कली लहसुन पीसकर मिला लें। इसे पीकर ऊपर से दूध पी लें। कुछ दिन यह प्रयोग करने से पीलिया दूर हो जाता है।

41- गठिया- 1. सरसों के तेल में लहसुन भूनकर मालिष करने से गठिया दर्द में आराम मिलता है।

42-  गठिया के कारण मांसपेषियों में दर्द होने पर घी के साथ 2 कली लहसुन पीसकर या 5 बूंद रस मिलाकर सेवन करें।

43-  6 ग्राम लहसुन का रस, 50 ग्राम गाय के दूध में डालकर कुछ दिन पीने से गठिया ठीक हो जाता है।

44- उदरषूल- घी के साथ लहसुन पीसकर खाने से दर्द ठीक होता है। नमक मिला, लहसुन का रस पिलाने से पेटदर्द में आराम मिलता है।

45- रक्तचाप- 1. लहसुन की कलियां धूप में सुखाकर, शीषी में भर लें। 15 दिन बाद, 2-2 कली खाकर, 1 चम्मच शहद खाकर, ऊपर से ठण्डा दूध पीने से रक्तचाप सामान्य हेाता है। कफ का शमन होता है और श्वास कष्ट में आराम होता है।

46-  प्रतिदिन 2-3 कली लहसुन खाने से उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है। लहसुन, पोदीना, जीरा, धनिया, कालीमिर्च व सेंधा नमक की चटनी बनाकर, रोजाना खाने से रक्तचाप सामान्य होता है।

47- कान बहना- 10 ग्राम लहसुन व 6 ग्राम सिंदूर पीसकर, 100 ग्राम सरसों के तेल में पकाएं। तेल आधा रह जाए तो छानकर, शीषी में भर लें। 2-3 बूंद यह तेल दिन में 3 बार कान में डालने से कान बहना बन्द हो जाता है तथा आवाज होना व खुजली आदि रोग दूर हो जाते हैं।