Ginger (अदरक) Benefits In Hindi

Adrak ke Gharelu Nuskhe

Ginger Adrak Se Rog Upchar –  रसोई का अत्यन्त उपयोगी रसायन है। यह एक पौधे की जड़ है, जो जमीकन्द की तरह जमीन में गड़ी हुई रहती है। इसमें बीज नहीं होता है। प्रकृति प्रदत्त तीखी, चटपटी, स्वादिष्ट अदरक का उपयोग प्राचीनकाल से चला आ रहा है। इसे घरेलू औषधि के रूप में माना गया है।  अदरक बोने के लिए इसके टुकड़े काटकर गाड़ दिये जाते है। अदरक में विशेष गंध और इसका स्वाद चटपटा होता है। अदरक दो रूपों में मिलता है- ताजा (गीला) और सूखा। अदरक जब पककर सूख जाता है तब यह सौंठ कहलाता है। अदरक और सौंठ के गुणों में काफी समानता है पर अदरक अधिक गुणकारी है। वैसे दोनों में ही पोषक तत्व बहुतायत में मिलते हैं।

इसे संस्कृत में आर्द्रक, हिन्दी में अदरक, मराठी में आलें, गुजराती में आदु, तेलुगु में अल्लम, कन्नड में अल्ल, तामिल में इंजि, फारसी में जिंजीबलतर तथा अंग्रजी में जिंजर रूट कहते हैं। इसका लैटिन नाम जिंजिवर आफिशिनेल है।  अदरक भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रयोग में लिया जाता है। कम्बोडिया में इसे टाॅनिक, चीन, मलेशिया व अफ्रीका में औषधि के रूप में काम में लेते हैं। इसे विश्व औषधि भी कहा जाता है।

अदरक मलभेदक, भारी, तीक्ष्ण स्वाद वाला, उदर की अग्नि को बढ़ाने वाला, चरपरा पाक में मधुर, वात-कफ का नाश करने वाला हृदय और गले के लिए फायदेमंद है। यह रूचि को उत्पन्न करने वाला, गले के लिए उपयोगी, खांसी और श्वास में उपयोगी है। यह वीर्यजनक है तथा सिर और छाती के रोगों में लाभदायक है। यह मुंह में लार अधिक उत्पन्न करता है, जिससे पाचन ठीक रहता है। इसके सेवन से भोजन के प्रति अरूचि दूर होती है। इसके सेवन से अफारा, कृमि और उदरशूल दूर हो जाता है। यह रक्तविकारों को नष्ट कर देता है।

कुष्ठ, पांडु, मूत्रकृच्छ, रक्तपित्त, ज्वर, दाह इत्यादि में बहुत अधिक लाभदायक है। अदरक से निकलने वाला तेल खुषबू वाले एसेंस के रूप में उपयोग किया जाता है।  अदरक में विटामिन ‘ए’ और ‘सी’ पाया जाता है। यह शक्ति और स्फूर्ति का अनमोल खजाना है। अदरक की ताजा और सूखे रूप की तासीर अलग-अलग होती है। नम रूप में इसकी तासीर ठण्डी व सोंठ रूप में गर्म होती है। सूखने पर अदरक खराब नहीं होता है।  गुणकारी और लाभप्रद होते हुए भी कुछ स्थितियों में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। भाव प्रकाष के अनुसार कुष्ठ, पाण्डुरोग, घाव, ज्वर, दाह रोग के रोगी को तथा सभी को ग्रीष्म एवं शरद ऋतु में अदरक का सेवन नहीं करना चाहिए। 

Adrak ke Gharelu Nuskhe

Benefit of ginger

Ginger Home-base Ayurvedic Treatment in Hindi

1- कान का दर्द- प्रातः 2-2 बूंद गुनगुना गर्म करके कान में डालने से दर्द में आराम मिलता है।

2- सिर का दर्द-  सुबह-षाम दूध में 5 ग्राम अदरक का रस डालकर पीने से सिर दर्द ठीक हो जाता है।

3- सर्दी से होने वाले सिरदर्द में सौंठ को पानी में घिसकर माथे पर लेप करें।

4- मसिक धर्म-  अदरक को पानी में उबालकर पीने से मासिक धर्म ठीक से आने लगता है।

5- 10 ग्राम सौंठ व 10 ग्राम गुड़ एक गिलास पानी में उबाले। पानी आधा रह जाने पर छानकर मासिक आने 15 दिन पहले से लें। रूक-रूककर मासिक का आना व दर्द ठीक होगा।

6- मर्दाना ताकत- संभोग की कमजोरी को दूर करने के लिए अदरक का रस, आधा चम्मच भीगी हुई मुनक्का और शहद के साथ सेवन करने से संभोग शक्ति बढ़ती है।

7- खाँसी-जुकाम-  अदरक के रस को दूध में उबालकर, उसमें गुड़ का टुकड़ा डालकर पीने से खाँसी-जुकाम दूर होते है।

8- अदरक का रस और शहद 1-1 तोला दिन में 2 बार सेवन करने से लाभ होता है। इससे खाँसी-दमा भी दूर होता है।

9- सांस के रोग- ताजे अदरक का रस, हल्के गर्म पानी में डालकर, एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से सांस के रोग दूर होते है।

10- ज्वर- 2 कप पानी में आधा चम्मच अदरक का पेस्ट व 25 पत्ते पोदीने के डालकर इतना उबालें कि पानी आधा रह जाए। फिर इसे छानकर गर्म-गर्म पीकर सो जाएं। पसीना आकर ज्वर उतर जाएगा।

11- उल्टी- अदरक और प्याज का रस समभाग मिलाकर 1-1 चम्मच मात्रा में दिन में 3 बार देने से उल्टी और जी मिचलाना बंद हो जाता है।

12- वायुगोला- अदरक का रस आधा चम्मच या अदरक के बारीक कटे हए 4-5 टुकड़े और 1 चम्मच शुद्ध घी मिलाकर खाने से गैस और वायुगोला का कष्ट दूर होता है।

13- दांत का दर्द- यदि सर्दी के कारण दांत का दर्द हो तो अदरक में नमक लगाकर दांत के नीचे रखने से दर्द में फायदा होता है।

14- सर्दी- अदरक की एक छोटी गांठ को बारीक काट कर, इसमें गुड़ की एक छोटी सी डली मसल कर आंच पर रखें। जब गुड़ पिघलने लगे तब अदरक व गुड़ को मिला लें। इसे गुनगुना गर्म सोते समय चबा-चबाकर खाएं। इसके बाद पानी न पिएं, सिर्फ कुल्ला करें।

15- हिचकी- ताजा अदरक को छीलकर, उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को चूसने से हिचकी आना बन्द हो जाती है।

16- मुँह की दुर्गन्ध- एक गिलास गुनगुने पानी में 1 चम्मच अदरक का रस मिलाकर कुल्ले करने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है।

17- गले में खराष- 1. अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े करके चूसने से लाभ होता है।

18-  नमक लगाकर अदरक खाने से गला साफ हो जाता है।

19- आवाज बैठना- 1. अदरक का रस, शहद में मिलाकर चाटने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

20- अदरक का रस गर्म पानी में मिलाकर गरारे करने से गला खुल जाएगा। अदरक को बारीक पीसकर उसके बराबर वजन की चाषनी में डालकर पकाएं। पक जाने पर सफेद जीरा, सौंठ, कालीमिर्च, नागकेसर, जावित्री, तेजपात, धनिया, पीपल, काला जीरा, बड़ी इलायची, पीपला मूल और वायविडंग प्रत्येक अदरक का 12 वां भाग लेकर कूट-छानकर मिलाएं।

21-  चम्मच चूर्ण प्रतिदिन लेने से बैठी हुई आवाज खुल जाती है।

22- 10 ग्राम मिश्री व 10 ग्राम सौंठ पीसकर, शहद में मिलाकर खाने से गला खुल जाएगा।

23- जुकाम- 1. अदरक, कालीमिर्च और गुड़ का काढ़ा बनाकर पीने से लाभ होता है।

24-  अदरक, तुलसी व कालीमिर्च की चाय बनाकर दिन में 3-4 बार पीने से नजला जुकाम में फायदा होता है।

26-  अदरक का रस 10 ग्राम में शहद मिला, गर्म कर दिन में 2-3 बार दें, लाभ होगा। मसूढ़ों की सूजन- 1. 3 माषा सौंठ का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से मसूढ़ों का फूलना व दांत का दर्द दूर हो जाता है।

27-  1 चम्मच अदरक का रस, 1 कप गुनगुने पानी में, चुटकी भर नमक मिलाकर, दिन में 3 बार मुंह में भरकर, घुमाकर पी जाएं। लाभ होगा। यदि मवाद हो तो केवल कुल्ला करके पानी बाहर थूक दें।

28- भूख की कमी-  6 माषा अदरक को महीन कतरकर, थोड़ा सा नमक लगाकर दिन में 1 बार 8 दिन तक सेवन करने से भूख खुलने लगेगी।

29-  भोजन के बाद अदरक व नींबू के रस में सेंधा नमक मिलाकर सुबह-षाम पीने से भूख खूब लगती है।

30- अजीर्ण व अपच नहीं होता।मुंह का स्वाद- अदरक का रस जीभ पर मलने से मुंह का स्वाद ठीक हो जाता है।

31- भांग का नषा- अदरक का रस पिलाने से भांग का नषा उतर जाता है।

32- बलखोरा-प्रतिदिन कुछ समय तक उस जगह पर अदरक का रस मलने से पुनः बाल निकल आता है।

33- वाय का दर्द- 125 ग्राम सौंठ रात को 500 मि.ली. पानी में पीसकर छान लें। 1 किलो आटा घी में भूनकर, पिसी सौंठ व 500 ग्राम पिसी चीनी व 2 तोला मिश्री मिलाकर रख लें। इसकी 50 ग्राम मात्रा दूध के साथ सेवन करने से वाय का दर्द ठीक हो जाता है।

34- साइटिका- नारियल के तेल में 1 टुकड़ा अदरक गर्म कर इस तेल की मालिष करने से साइटिका तथा म्यरैजिलया में लाभ होता है।

35- बवासीर-एक गिलास छाछ में, चैथाई चम्मच सौंठ घोलकर रोजाना पिएं।बलगमी खांसी- अदरक का रस और 5 ग्राम शहद मिलाकर चाटने से बलगमी खाँसी से लाभ होता है।

36- हृदय रोग- अदरक का रस व पानी समभाग मिलाकर, सुबह-षाम पीने से हृदय रोग दूर हो जाता है। दस्त- अदरक का रस नाभि पर लगाने से दस्त बंद हो जाते है।

37- पेट दर्द- 1. अपच या आंतों में मल सूखने पर पेटदर्द होता है। सौंठ, हींग व कालीमिर्च प्रत्येक 2 ग्राम भोजन के बाद गुनगुने जल से सुबह-षाम लेने से दर्द ठीक होता है।

38-  अदरक व अजवायन, नींबू के रस में भिगोकर, छाया में सुखा लें। पीसकर थोड़ा सा नमक मिला लें। सुबह-षाम 1 ग्राम चूर्ण पानी के साथ सेवन करें। खट्टी डकारें, गैस, पेट दर्द आदि विकार दूर हो जाते हैं।

39- अदरक व पोदीने के रस 1-1 चम्मच में 1 ग्राम सेंधा नमक डालकर पीने से उदरषूल मिटता है।पतले दस्त- आधा कप उबलते पानी में 1 चम्मच अदरक का रस मिलाकर 1-1 घण्टे में पीने से पतले दस्त एकदम रूक जाते हैं।

40- पित्ती-  शीत-गर्मी से उछली पित्ती में असहनीय खुजली व जलन होने पर अदरक का रस व शहद मिलाकर चटावें। फायदा होगा।

41- अदरक, अजवायन व पुराना गुड़ पीसकर 4-4 घण्टे के अन्तर से 20-20 ग्राम फंकी गुनगुने पानी के साथ लेने से आराम होगा।

42- जलोदर-  पेट में पानी भर जाने पर 50 ग्राम अदरक कुचलकर, रस निकालें इसे प्रातः सालम मिश्री मिलाकर पीने से लाभ होगा।

43- 10 ग्राम अदरक के रस में 20 ग्राम पुराना गुड मिलाकर, सुबह-षाम कुछ दिनों तक लेने से जलोदर रोग समाप्त हो जाता है।

44- जिगर की सूजन- अदरक की 2 गांठे, 1 मूली और आधे नींबू के रस मिली चटनी में नमक मिलाकर खाने से जिगर की सूजन मिट जाती है।

45- बहुमूत्र- अदरक के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है। मिर्गी- 25 ग्राम अदरक का रस गर्म करके रोगी को दें, लाभ होगा।

46- अम्लपित्त- 5 ग्राम अदरक का रस व 5 ग्राम अनार का रस देने से अम्ल पित्त ठीक हो जाता है।

47- नेत्ररोग- अदरक को जलाकर बारीक पीस लें। काजल की तरह आंख में लगाएं। इससे नेत्रों में हल्का जाला आदि रोग दूर हो जाते है।

48- गठिया- 25 ग्राम सौंठ, 100 ग्राम हरड व 15 ग्राम अजमोद, पीस छानकर 3-4 ग्राम मात्रा सुबह-षाम गुनगुने पानी के साथ लेने से लाभ होता है।

49- अंड वृद्धि- वायुविकार के कारण यदि अंडकोष बढ जाए तो अदरक के रस में शहद मिलाकर सेवन करें।

50- नाभि हटना, अतिसार- अदरक के रस में कपड़ा भिगोकर नाभि पर प्रति 15 मिनट बाद बदलते हुए रखे नाभि यथा स्थान बैठ जाती है और अतिसार रूक जाता है।

51- सन्निपातिक ज्वर- अदरक के रस में, त्रिकुटा व सेंधा नमक मिलाकर देने से गले में जमा कफ निकल जाता है और आराम मिल जाता है।

52- सान्निपात- अदरक के रस में थोड़ा सा लहसुन का रस मिलाकर रोगी के शरीर पर मर्दन करने से लाभ होता है।

53- न्यूमोनिया- अदरक के रस में 1-2 पुराना घी व कपूर मिला कर गर्म करके लेप करने से शीघ्र लाभ होता है।

54- आधासीसी- रोगी का सिर पलंग पर नीचा करके लिटा दें। जिधर के भाग में दर्द हो, उधर नाक के छेद में अदरक का रस, शहद व जल समभाग मिला 2-3 बूंद डालें। 3-4 बार करने से लाभ होगा।