Garbhpat Rokne Ke Gharelu Nuskhe

Garbhpat

Garbhpat  Rokne Ke Gharelu Nuskhe

गर्भ स्त्राव तीन माह से पूर्व यदि गर्भ गिरता है तो गर्भस्त्राव कहलाता है। जब गर्भस्त्राव होता है तो रक्तस्त्राव होने लगता है। केवल रक्तस्त्राव ही होता है, तो यह ज्ीतमंजमदमक ।इवतजपवद कहलाता है। यदि रक्तस्त्राव के साथ दर्द रहे तो गर्भस्त्राव होने की अत्यधिक सम्भावनायें होती हैं।

Garbhpat Hone Ke Karan

Garbhpat hone ke karan  – नई बीमारियाँ, जैसे-निमोनिया, संक्रामक-ज्वर, पुरानी बीमारियाँ, जैसे-सिफलिस, टी.बी.। गर्भाशय सम्बन्धी खराबी, पेट में आघात लगना, भय, मानसिक आघात, बच्चे का ठीक ढंग से विकास व निर्माण न होना, गर्भस्त्राव होने की प्रवृत्ति, विटामिन ‘ई’ की कमी, अन्तः स्त्रावी ग्रन्थियों की खराबी आदि अनेक कारणों से गर्भस्त्राव होता है। यदि किसी स्त्री को लगातार दो बार गर्भपात हो चुका है तो अगला गर्भ भी गिरने की सम्भावना हो सकती है। तीन बार गर्भ गिरने पर तो चैथी बार गर्भस्त्राव होने की अत्यधिक सम्भावना होती है। क्षयग्रस्त स्त्रियाँ जो नाजुक, कोमल प्रकृति की होती हैं, प्रायः गर्भस्त्राव करती है।

Abortion (Garbhpat)

Garbhpat rokne ke upchar

Garbhpat गर्भपात रोकने के घरेलू उपाय

1- Garbhpat Rokne Ke Ayurvedic Treatment Hindi –  जिस स्त्री को गर्भस्त्राव होता हो, उसे भारी बोझा नहीं उठाना चाहिए। आराम करना चाहिए। रक्तस्त्राव तथा पेट-दर्द होने पर तो पूर्ण आराम करना चाहिए। रक्तस्त्राव की स्थिति में चारपाई के पाँव की ओर के पायों के नीचे ईंट लगाकर ऊँची कर देनी चाहिए। जो कारण समझ में आये उन्हें दूर करना चाहिए। पति-सहवास नहीं करना चाहिए। माँ को स्वस्थ रहना चाहिए। स्वस्थ माँ ही स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है। चिकित्सा- जिन्हें बार-बार गर्भस्त्राव हो उन्हें गर्भधारण के प्रथम माह से ही चिकित्सा आरम्भ कर देनी चाहिए। जिन्हें गर्भस्त्राव की प्रवृत्ति हो उन्हें बिना गर्भ के ही सतर्कता, गर्भस्त्राव रोकने वाली वस्तुयें सेवन करते रहना चाहिए।

2- विटामिन ‘ई’- यह गेहूँ औश्र अन्य बीजों के फूटते अंकुरों में मिलता है, कोमल पत्तों एवं दूध में मिलता है। गर्भधारण एवं स्वस्थ गर्भस्थ के लिए यह आवश्यक है। विटामिन ‘ई’ की कमी से पुरूष में शुक्रों को उत्पन्न करने वाली थैली नष्ट हो जाती है, जिससे शुक्र-कणों में क्षीणता आ जाती है और पुरूष में बच्चा पैदा करने की थैली नष्ट हो जाती है, जिससे शुक्र-कणों में क्षीणता आ जाती है और पुरूष में बच्चा पैदा करने की शक्ति नष्ट हो जाती है। जिन पुरूषों के वीर्य में शुक्र नहीं होते उन्हें विटामिन ‘ई’ निरन्तर लेना चाहिए। निम्न वस्तुओं में विटामिन ‘ई’ बहुत मिलते हैं-

3- Garbhpat rokne ke upay in hindi –  गेहूँ को बारह घंटे पानी में भिगोयें, फिर गीले मोटे कपड़े में बाँध कर चैबीस घंटे रखें। इनमें अंकुर निकल आयेंगे। इन अंकुरित गेहुँओं में भरपूर विटामिन ‘ई’ मिलता है। पिस्ता-पिस्ते में भी विटामिन ‘ई’ मिलता है। विटामिन ‘ई’ गर्भस्त्राव रोकता है।

4- Garbhpat rokne ke gharelu nuskhe – 100 ग्राम अनार के ताजा पत्ते पीसकर, पानी में छानकर पिलाने और पत्तों का रस पेडू पर लेप करने से गर्भस्त्राव रूक जाता है। सिंघाड़ा- गर्भाशय की निर्बलता से गर्भ नहीं ठहरता, गर्भस्त्राव हो जाता है। इसमें कुछ सप्ताह ताजे सिंघाड़े खाने से लाभ होता है।

5- चना- यदि गर्भपात का भय हो तो काले चनों का काढ़ा पिलायें।

6- Garbhpat rokne ke gharelu upay –  पिसी हुई फिटकरी चैथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डालकर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रूक जाता है। गर्भपात के समय जब दर्द, रक्तस्त्राव हो रहा हो तो हर दो-दो घण्टे से एक खुराक दें।

7- Garbhpat rokne ke totke –  गर्भपात की समस्या से बचने के लिए महिलाएं पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ एवं भैंस के दूध का उपयोग कर सकते हैं। गर्भपात को रोकने के लिए पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ को अच्छी तरह से पीस लें। अब एक गिलास भैंस का दूध लें और उसके साथ पीपल की बड़ी कंटकारी की जड़ के चूर्ण को फांक लें। रोजाना दूध के साथ इस चूर्ण का सेवन से गर्भपात होने की सम्भावना कम हो जाती है।

8- Abortion (Garbhpat) rokne ki dawa – गर्भपात को रोकने के लिए आप हरी दूब के पंचाग का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए हरी दूब के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फूल तथा फल) को लें। अब दूब के पंचाग को अच्छी तरह से पीस लें। पिसने के बाद दूब के पंचाग में थोड़ी मिश्री और दूध के पंचाग में थोड़ी मिश्री और दूध को मिला लें। मिलाने के बाद इस मिश्रण से बना हुआ 250 से 300 ग्राम शर्बत का सेवन गर्भावस्था के दौरान करें। आपको लाभ होगा।

9- Garbhpat rokne ki medicine –  गर्भपात को रोकने के लिए आप मूली के बीजों का तथा भीमसेनी की कपूर का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए मूली के बीजों को अच्छी तरह से पीस लें। अब मूली के बीजों के चूर्ण को भीमसेनी कपूर तथा गुलाब के अर्क में मिला लें। अब इस चूर्ण को अपनी योनी में मलें। इस चूर्ण का प्रयोग योनी में मलें। इस चूर्ण का प्रयोग गर्भावस्था में करने से महिला को बहुत ही फायदा होता है। अगर किसी महिला को गर्भा स्त्राव की समस्या है तो वह इस चूर्ण का प्रयोग करके अपनी इस समय से छुटकारा पा सकती है।

10- Garbhpat ko rokne ke upay – गर्भपात को रोकने के लिए महिलाएं गाय के दूध और जेठीमधु का भी इस्तेमाल कर सकती है। गर्भपात को रोकने के लिए गाय का दूध लें और जेठीमधु लें अब इन दोनों को मिलाकर काढ़ा तैयार कर लें अब इस को पी लें आप इस काढ़े को अपनी नाभि के नीचे के भाग पर भी लगा सकते है। काढ़े का सेवन करने से तथा काढ़े को नाभि के निचले भाग पर लगाने से महिला को गर्भावस्था के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी।

11- Abortion (Garbhpat) rokne ke upay –  जिन स्त्रियों को बार-बार गर्भस्त्राव होता है उन्हें नियमित तौर पर लौकी का जूस या सब्जी का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा सिंघाड़े का सेवन भी बहुत लाभप्रद है।

12- ज्वासा, सरिवा, पद्माख, रासना, मुलेठी और कमल इन सबको पीसकर गाय के दूध के साथ प्रतिदिन प्रातः-सायं करने से गर्भस्त्राव रूक जाता है।

13- भीमसेनी कपूर, अर्क गुलाब में पीसकर योनि पर मालिश करने से गिरता हुआ गर्भ रूक जाता है।

14- गाय के दूध में कच्चे गूलर का फल पकाकर पीने से गर्भ स्थिर होता है।

15- शहद और बकरी के दूध में कुम्हार के चाक की मिट्टी खाने से गिरता हुआ गर्भ ठहर जाता है।

16- होम्योपैथ-वाइबरनम पुनस 10 बूंद दिन में तीन बार, खून काले रंग का हो क्रियोजोट 30 दिन में तीन बार सातवें महीने के बाद ओपियम 200 से लेकर 1 ड तक चिकित्सीय सलाह के अनुरूप लें