Rheumatoid Arthritis Treatment -Gathiya Rog (गठिया रोग )

Rheumatoid Arthritis को Gathiya   Rog गठिया रोग कहते है. क्या आप गठिया (Arthritis) रोग से पीडित हैं? आमवात जिसे गठिया (Gathiya) भी कहा जाता है, Rheumatoid Arthritis बहुत दर्द दायक बीमारी है। इसमें जोडों में दर्द (Joint Pain) होता है, शरीर मे यूरिक एसीड की मात्रा बढ जाती है। इस रोग की सबसे बडी पहचान ये है कि रात को जोडों का दर्द (Joint Pain) बढता है और सुबह अकडन महसूस होती है।इस Rog का शीघ्र ही उपचार (Upchar) कर नियंत्रण करना आवश्यक है।

Rheumatoid Arthritis Symptoms – Gathiya Lakshan

गठिया रोग के लक्षण –
1. खाना अच्छा ना लगना।
2. बहुत ज्यादा आलस आना।
3. बुखार आना।
4. शरीर के अलग-अलग अंगो में सूजन आना।
5. कमर और घुटनो में बहुत तेज दर्द होना।
6. दर्द के कारन रात भर सो न पाना।
7. पैरो और हाथो की उँगलियों में सूजन आना।
8. जोड़ो में सूजन।
9. बहुत ज्यादा प्यास लगना।
10. हाथ – पैरो में गांठ बन जाती है।
11. चलते समय कठिनाई होना।

Arthritis Diet Chart  –

1- Gathiya Rog गठिया रोग में निम्नलिखित बातो का ध्यान जरूर रखे जिससे Rheumatoid Arthitis गठिया रोग में बहुत आराम मिलता है –

2- Arthritis में फल, सब्जियाँ, मेवे, जैतून का तेल, और मछली अधिक मात्रा में खाएँ साथ ही छना हुआ पानी अधिक मात्रा में पियें।

3- Gathiya Rog में पनीर और अन्य डेरी उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, कैल्शियम युक्त सोया पेय, बादाम और मछली खाये.

4- विटामिन C युक्त आहारों में स्ट्रॉबेरी, नीबू, चेरी, अमरुद, टेंग, संतरे का रस, ग्रेपफ्रूट का रस, लाल अथवा हरी शिमला मिर्च, हरी मिर्च, धनिया, नीबू का छिलका, धुप में सुखाये टमाटर Rheumatoid Arthitis लाभदायक है ।

5- विटामिन D से समृद्ध आहार जैसे कि सैलमन, ट्यूना, श्रिम्प, सूरजमुखी के बीज, अंडे और विटामिन D युक्त दुग्ध उत्पाद, Rheumatoid Arthitis होने से बचाव करते हैं।

6- कुछ लोगों में प्रोटीन से सूजन आती है इसलिए प्रोटीन युक्त आहारों का प्रयोग सीमित करें।

7- रिफाइंड आहार जैसे कि सफ़ेद ब्रेड, पास्ता, और शक्कर से परहेज।

8- स्वास्थ्यवर्धक तेलों का प्रयोग करें जैसे कि जैतून का तेल या वनस्पति तेल।

9- बेकरी के उत्पाद जैसे कूकीज, क्रैकर्स, केक्स, फ्रेंच फ्राइज, अनियन रिंग्स, डोनट्स, प्रोसेस्ड आहार, और मार्गरिन का प्रयोग कम करें।

10- कैफीन और अन्य उत्तेजक पेय, शराब, और तम्बाकू से परहेज।

11- रोगी को तेल, मक्खन, घी आदि में तले गए पदार्थों से परहेज करना चाहिए। इसी प्रकार, भिण्डी, कटहल, चावल का निषेध करना चाहिए, गेहूँ, ज्वार, जौ का प्रयोग करना उपयुक्त होता है। अपने आहार में अत्यन्त गरम मसालों तथा मिर्च का प्रयोग उचित नहीं है। सौंठ, काली मिर्च, जीरा, लौंग तथा दालचीनी जैसे मध्यम मसालों का प्रयोग लाभदायक होता है।

12- ओमेगा-3 फैटी एसिड से समृद्ध आहार जैसे मछलियाँ (सैलमन, ट्यूना, ट्राउट), अखरोट, टोफू और अन्य सोया उत्पाद, अलसी और अलसी का तेल, और केनोला का तेल।

13- आयरन से समृद्ध आहार जैसे लीन रेड मीट, अंडे, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दालें (मटर, फलियाँ और मसूर), और शक्तियुक्त नाश्ते वाला दलिया।

14- कैल्शियम से समृद्ध आहारों में दूध, दही, अचार, इमली, सिरका आदि पदार्थों से रोगी को दूर रहना चाहिए। रोगी की इच्छा हो, तो वह थोड़ी मात्रा में छाछ ले सकता है, परन्तु वह खट्टी न हो।

15 – अदरक, हल्दी और हरी चाय में सूजन को कम करने के गुण होते हैं।

Yoga And Exercise For Arthritis

Gathiya Rog  में  व्यायाम Exercise –

1- नियमित व्यायाम जिनमें एरोबिक व्यायाम, शक्तिदायक व्यायाम, और लचीले या गति प्रदान करने वाले व्यायामों से जोड़ों को गति और शक्ति मिलती है।

2- व्यायाम जैसे कि पैदल चलना, तैरना, गर्म पानी में व्यायाम, या बाइकिंग आरए के रोगियों द्वारा किया जा सकते हैं।
वजन सहने वाले व्यायाम जैसे कि वजन उठाना या पुश अप किये जा सकते हैं।

3- व्यायाम जैसे कि दौड़ लगाना, भागना, भारी वजन उठाना, जिनसे जोड़ों पर अत्यधिक जोर पड़ता है, उन्हें नहीं करें।

Yoga For Arthritis

gahtiya रोग में निम्नलिखित योग करके गठिया रोग के दर्द को कम किया जा सकता है साथ ही इसको नियंत्रित भी कर सकते है –

1- बद्ध कोणासन

2- विडालासन विन्यास

3- वृक्षासन

4- सुखासन

5- शवासन

6- संगीत और ध्यान

7- प्राणायाम (breathing exercises) और ध्यान का नियमित अभ्यास प्रतिरक्षक तंत्र का संतुलन करता है।

8- जोड़ों के दर्द Joint Pain से बचने के लिए सबसे अच्छा। योगासन है गोमुखआसन।

Rheumatoid Arthritis Gharelu Upay

1-दर्द के समय आप सन बाथ ले सकते हैं।

2- 5 से 10 ग्राम मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर सुबह पानी के साथ लें।

3- 4 से 5 लहसुन की कलियों को एक पाव दूध में डालकर उबालकर पीयें।

4- लहसुन के रस को कपूर में मिलाकर मालिश करने से भी दर्द से राहत मिलती है।

5- लाल तेल से मालिश करना भी आरामदायक होता है।

6- गर्म दूध में हल्दीर मिलाकर दिन में दो से तीन बार पीयें।

7- सोने से पहले दर्द से प्रभावित क्षेत्र पर गर्म सिरके से मालिश करें।

8- शरीर में पानी की मात्रा संतुलित रखें।

 Arthritis Treatment

9- गठिया की प्रारंभिक अवस्था में जब जोड़ों में सूजन का अनुभव होता है, तो सही ढंग से आराम करने से भी लाभ होता है | परंतु जब यह रोग बढ़ जाता है और सूजन समाप्त नहीं होती तो चिकित्सक एस्पीरिन तथा सूजन को समाप्त करने के लिए दवाइयां देने लगते हैं | स्टेराइड हार्मोंस जैसी दवाएं भी दी जाती हैं |

10- इस रोग में कई बार प्रभावित जोड़ों को शल्य चिकित्सा द्वारा बदल भी दिया जाता है | गठिया के रोगी के लिए आयुर्वेद में पंचकर्म का विधान है | इसमें शरीर में मालिश, भाप स्नान, विरेचन अथवा जड़ी-बूटियों से बनाई गई गरम पोटलियों से सेंक और मालिश आदि की जाती है | परंतु पंचकर्म करते समय रोगी की आयु और उसकी सहनशक्ति का ध्यान रखना आवश्यक है | अधिक कमजोर रोगी के लिए पंचकर्म ठीक नहीं | पूरी तरह से पंचकर्म में प्रशिक्षित न होने पर रोगी को इससे हानि भी हो सकती है |

11- गठिया के रोगी को यदि निमोनिया अथवा कोई अन्य रोग हो गया हो तो पहले उसका इलाज करना चाहिए |

12- गठिया के रोगी के लिए सेब बहुत ही उपयोगी है | सेब का उपयोग उस स्थिति में और अधिक बढ़ जाता है जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा अधिक हो | सेब के सेवन से यूरिक एसिड की मात्रा में कमी आती है | सेब को उबालकर जैली के रूप में दर्द और सूजन वाले स्थान पर लगाने और रगड़ने से भी गठिए के रोगी को लाभ होता है |

13- कुछ चिकित्सकों का विश्वास है कि गठिया के रोगी को तीन या चार दिन तक खाने के लिए केवल केला देना चाहिए | रोगी को प्रतिदिन आठ से नौ केले दिए जा सकते हैं | अन्य कोई चीज खाने के लिए नहीं देनी चाहिए | इससे भी लाभ होता देखा गया है |

14- खीरा भी गठिया के रोगी के लिए लाभकारी है | खीरे के रस में गाजर, चुकन्दर और अजवाइन के पत्तों का रस मिलाकर देने से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम हो जाती है | इस रस का भोजन आदि के साथ उपयोग करना अत्यन्त लाभदायक है |

15- लहसुन के उपयोग से भी जोड़ों में होने वाला दर्द समाप्त होता है | सबसे अच्छा यह है कि लहसुन की कुछ तुरियां छीलकर नियमित रूप से चबाई जाएं | इस प्रकार इसका रस त्वचा और रक्त में जल्दी ही घुल कर रोग से प्रभावित अंगों को लाभ पहुंचाता है |

16- गठिया के रोगी को भोजन से पूर्व कच्चे आलू का दो चम्मच रस पीने से लाभ होता है | इससे भी यूरिक एसिड की मात्रा कम होने लगती है | गठिया के रोगी के लिए आलू का छिलका भी बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है | छिलके में आवश्यक लवणों की काफी मात्रा पाई जाती है | छिलके को उबालकर और छानकर प्रतिदिन दिन में सात-आठ बार देने से रोगी को लाभ होता है | उपलों की आंच में आलू भूनकर सेवन करने से भी गठिया में लाभ होता है |

17- 50 पत्ती हरा पोदीना या आधा चम्मच पिसा हुआ सूखा पोदीना एक गिलास पानी में उबालें। उबालते हुए आधा पानी रहने पर छानकर नित्य दो बार पीयें। गठिया के दर्द में लाभदायक है।

18- गाजर के रस का रोजाना सेवन , गठिया को ठीक करता है।

19- गाजर, ककड़ी, चुकन्दर तीनों का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से शीघ्र लाभ होता है। यदि तीनों सब्जियाँ, उपलब्ध न हों तो जो मिलें उन्हीं का मिश्रित रस पीना चाहिए।

20 पजामें या पतलून के दोनों जेबों में लगातार एक छोटा-सा आलू रखें तो यह आमवात(Rheumatic) से रक्षा करता है।

21- प्याज का रस तथा सरसों का तेल समान मात्रा में मिला कर दर्द वाले स्थान पर मालिश करने से लाभ होता है।

22- एक गाँठ लहसुन छील कर रात को एक कप पानी में डाल दें। प्रातः पीस कर उसी पानी में घोल कर पीजिये। इसके बाद एक चम्मच मक्खन खायें। इस प्रकार एक सप्ताह लें। एक सप्ताह बाद दो गाँठ इसी प्रकार दूसरे सप्ताह में, तीसरे सप्ताह में तीन गाँठ नित्य इसी प्रकार लें। वात रोग(Gout) में लाभ होगा।

23- लहसुन के तेल की मालिश प्रतिदिन करनी चाहिए( सरसो के तेल में दो लहसुन की कली ऐस से पका ले लहसुन का तेल तैयार ) ।

24- लहसुन की एक बड़ी गाँठ को साफ करके, दो-दो टुकड़े करके दूध में उबाल लेना चाहिए। इस प्रकार तैयार की गई लहसुन की खीर 6 सप्ताह पीने से गठिया दूर हो जाती है। यह दूध रात को पीना चाहिए। दूध की खीर, लहसुन को दूध में पीसकर, उबाल कर भी ले सकते है। मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाते जाना चाहिए।

25- खटाई, मिठाई का परहेज रखना चाहिए। लहसुन को पीसकर तिल के तेल में मिलाकर खाने से वात (Gout) रोग में शीघ्र लाभ होता है।

26- आधा चम्मच लहसुन का रस एक चम्मच गर्म घी में मिला कर सुबह-शाम दो बार नित्य पीने से आमवात(Rheumatic) में लाभ होता है।

27- जोड़ों में दर्द हो, पैर में दर्द हो तो चने की दाल में बराबर हींग की फँकी पानी से एक बार नित्य एक महीना लें।

28- गठिया के रोगी को नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।

29- वात रोगों(Gout) में मेथी का शाक लाभ करता है। मेथी को घी में भूनकर पीसकर छोटे-छोटे लडडू बनाकर दस दिन सुबह-षाम खाने से वात-पीड़ा में लाभ होता है। गुड़ में मेथी का पाक बनाकर खिलाने से गठिया मिटती है।

30- चाय की चार चम्मच दाना मेथी रात को एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह पानी छानकर हल्का गर्म करके पीने से लाभ होता है। भीगी मेथी को अंकुरित करके खायें।

31- दो चम्मच दाना मेथी को दो कप पानी में उबालकर जब आधा पानी रहे तो पानी नित्य दो बार एक महीना पीएँ। इससे गठिया, कमर-दर्द और कब्ज में लाभ होता है।