Aant (Colon) Ka Cancer Treatment Hindi

Aant Ka Cancer Treatment

Aant Ka Cancer (Colon cancer) आँतों का कैंसर –  पाचन तंत्र का सबसे निचला भाग कोलन होता है। इसे बड़ी आँत (Badi Aant) भी कहते है। यह आँत का आखिरी 5 या 6 फुट भाग होता है और कोलन का आखिरी 8-10 इंच रेक्टम होता है। भोजन के पचने के बाद, ठोस मल इनसे होते हुए शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।  छोटी आँत का कैंसर बहुत कम होता है। जबकि बड़ी आँत या कोलन में कैंसर की बहुत संभावना रहती है। कोलोरेक्ट्रल कैंसर नए निदान किए गए 13 प्रतिषत कैंसरों तथा संसार के सभी कैंसरों में चैथा स्थान रखते हैं। यह स्त्री व पुरूषों में समान रूप से होता है। यह भी अधिक उम्र में पाया जाता है।

Aant Ka Cancer Treatment

Badi aant ke thik karne ayurvedic treatment hindi

Colon Cancer Causes – Badi Aant Ka Cancer Hone Ka Karan

आँत का कैंसर होने का कारण विषेष तो मालूम नहीं हो पाया है, परन्तु ऐसा विष्वास है कि 40 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को आँतों का कैंसर होने की सम्भावना अधिक रहती है। आयु के बढ़ने के साथ ही इसकी आषंका और अधिक बढ़ जाती है। भोजन में अनियमितता के कारण भी इस रोग के होने की संभावना रहती है। जीव वसा से रोग की संभावना बढ़ जाती है। जीव प्रोटीन तथा कम रेषे वाला भोजन तथा विटामिन डी की कमी कैंसर की संभावना बढ़ाता है। बड़ी आँत में अधिकतर कब्ज अथवा घाव रहने से यह रोग हो जाता है। आजकल यह घाव कोलाइटीस के रूप में होता है।

Colon Cancer Symptoms – Badi Aant Cancer Ke Lakshan

1- मल पतले रूप में निकलना।

2- पेट में साधरण गड़बड़ियाँ।

3- कब्ज या दस्त का बार-बार होना।

4- मल में खून का आना।-गैस का दर्द जो अक्सर हो।

5- लगातार थकान।-उदरगत् कष्ट, आध्यमान।

6- बिना किसी कारण के वजन का घटना।

  • आंत्र के कार्सिनोमा के कैंसर अथवा मलाषय कैंसर विषेष रूप् से 50-60 वर्ष की आयु के बीच वालों को होता है, तब विचारणीय हो जाता है। विषेषकर उस अवस्था में जब रोगी की आंत्र में पहले से कोई रोग नहीं रहता, ऐसी अवस्था में किसी प्रकार का आहार परिवर्तन से भी मलावरोध (कब्ज) उत्पन्न होकर अतिसार होने लगता है। अतएव यह कारण बिल्कुल विचित्र तरह का होता है। आँतों में जब अर्बुद होता है, तब कोष्ठबद्धता हो जाना निष्चित है, क्योंकि आँतों के मध्य भाग को संकुचित कर देता है। इस प्रकार अधिकांष रोगियों को मलावरोध (कोष्ठबद्धता) होने के उपरांत अतिसार होने लगता है।
  • रोग के कारण प्रारंभ में कोई लक्षण नहीं मिलते हैं। कभी-कभी कब्जियत तथा पेट में दर्द के लक्षण होते हैं। यह दर्द कभी इतना अधिक हो जाता है कि बरदाषत करना मुष्किल हो जाता है।  साधारण मलावरोध के पश्चात् जो मल आते हैं और अर्बुद के कारण आने वाले मल अतिसार में कोई विषेषकर मल के साथ सफेद लच्छे कटकर निकलते हैं। मल फीते के समान होता है और साथ ही रक्त से मिला हुआ पाखाना या पाखाना हो जाने के पश्चात् रक्त का आ जाना लक्षण प्रतीत होता है।
  • कंैसर ग्रस्त रोगी को विषेष रूप से प्रथम लक्षण दुर्बलता एवं रक्ताल्पता का होता है। ठहर-ठहर तीव्र वेदना के कारण रोगी का मन व्याकुल रहता है, तथा उसे मानसिक तनाव अधिक रहता है, जिससे कैंसर रोगी को नींद नहीं आती है। किसी-किसी रोगी को भोजन से अरूचि होकर भूख मर जाती है। इसके कारण दुर्बलता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती है।   कभी-कभी रोगी को यकायक मलमार्ग से प्रातःकाल अत्यधिक रक्त स्त्राव होता है। आगे चलकर उदर पर स्पर्ष करने पर एक प्रकार का उभार मिलता है। रोगी की पहचान-इस रोग की पहचान लक्षणों के प्रतीत होने पर परीक्षण एवं जाँच से होती है। लक्षण के प्रतीत होते ही किसी चिकित्सक से परामर्ष लेने के पश्चात् लेबोरेटरी परीक्षण करा लेना चाहिए।

बेरियम एनीमा देकर रोगी के एक्स-रे परीक्षण से उसमें साफ पता चल जाता है कि रोगी के बड़ी आँत के किस भाग में कैंसर है। इसके अतिरिक्त रक्त जाँच, गुह्ययतदर्षी परीक्षा, बायोप्सी तथा रेडियोआइसोटोप्स जाँच परीक्षा की जाती है। आलकल आंतरिक दृष्य देखने के लिए टेलीस्कोप हैं, उसी तरह आमाषय के लिए गेस्टस्कोप का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से बड़ी आँत के अन्दर के पूरे भाग को देखा जा सकता है। ये जाँच के तरीके आजकल सभी अस्पतालों में उपलब्ध हैं।

आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त कफादि दोष धातु के निदान एवं नाड़ी परीक्षा आदि के द्वारा कैंसर की उपस्थिति का निर्णय किया जाता है।  यदि परीक्षण में कैंसर की उपस्थिति का पता नहीं चलता है तो मालूम करना पड़ता है कि किन कारणों से वे लक्षण प्रतीत हुए है। कभी-कभी रक्तस्त्राव को रोगी बवासीर या भगंदर समझ कर टाल देते है।

Colon Cancer (Badi Aant Ka Cancer) Treatment in Hindi –

चूँकि इस कैंसर की गाँठ के कारण मल पास (साफ) होने में अवरोध उत्पन्न होता है। इसलिए सबसे पहले मल का रास्ता पेट में आॅपरेषन द्वारा बनाया जाता है। यदि रोग अधिक नहीं बढ़ पाया है, तो आॅपरेषन द्वारा उतने भाग को काटकर निकाल दिया जाता है अतएव मल का रास्ता पेट में बना दिया जाता है। यदि रोग अधिक बढ़  गया है, तो दवाओं द्वारा उपचार किया जाता है (कीमोथेरेपी) ऐडजुवेन्ट थेरेपी में दवाओं का प्रयोग पहले सर्जरी या रेडिएषन थेरेपी से बचे हुए कैंसर को मारने में किया जाता है। इसका प्रयोग तब भी किया जाता है जब कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैल चुका होता है।

रेडिएषन थेरेपी, इसे एक्स-रे थेरेपी या कोबाल्ट थेरेपी भी कहते हैं। इसमें उच्च ऊर्जा की किरणें कैंसर को रोकने में प्रयोग की जाती है। कभी-कभी रेडियोथेरेपी का प्रयोग ट्यूमर के आकार को छोटा करने के लिए सज्ररी के पहले करते हैं। प्रायः इसका प्रयोग सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर कोषिकाओं को मारने में किया जाता है। ज्यादातर मरीजों का इलाज बिना भर्ती किए हुए ही किया जा सकता है।

Colon Cancer ( Badi Aant Ka Cancer) Ayurvedic Treatment Hindi  –

1- अभी-तक परीक्षणों से यह सिद्ध हुआ है कि कैंसर की सभी अवस्थाओं में ‘हीर भस्म’ और हीरा भस्म के योग से बनी औषधियाँ अत्यधिक उपयोगी सिद्ध हुई है। पर यह एक मंहगी औषधि है।

2- सोमेषवर रस, प्रवाल पिष्टी 125-125 मि. ग्रा., कैंसर गज केसरी रस 250 मि.ग्रा.। यह एक मात्रा है। ऐसी 1 मात्रा बकरी के दूध के साथ अथवा अमलतास फली के गूदे के क्वाथ के साथ दिन में 3 बार दें। कैंसर में अति उपयोगी हैं

3- बज्र पर्पटी -यह हीरा भस्म के योग से निर्माण किया जाता है जो आमाषय एवं महास्त्रोतस के कैंसर में अत्यधिक उपयोगी है। मात्रा 125 मि. ग्रा. की मात्रा मधु अथवा फटे हुए दूध के पानी के साथ दिन में 3 बार तक दिया जा सकता है। -गाजर का रस पीने से पेट के कैंसर में लाभ होता है।

4- लहसुन की कुछ मात्रा प्रतिदिन रगड़कर और पानी में घोलकर कुछ सप्ताह पीने से पेट का कैंसर ठीक हो जाता है। कैंसर अधिक फैलने नहीं पाता।

5- फूलगोभी का रस आधा या पौन कप प्रतिदिन नित्य प्रातःकाल भूखे पेट पीते रहने से आँतों के कैंसर में लाभ होता है।

आवश्यक निर्देष-कुछ चिकित्सकों का मानना है कि आँतो अथवा पेट के कैंसर में उपचार आरंभ करने से पूर्व रोगी को एक दो दिन उपवास कराएँ। उपवास के दिनों में रोगी को अंगूर का रस सेवन कराना चाहिए। इन दिनों हल्का विरेचन लेने से आँतों को आराम मिलता है।

याद रहे- कैंसर के रोगी को अंगूर का रस देने पर कभी-कभी पेअ में दर्द या मलद्वार में जलन होती है। लेकिन यह कोई चिंता की बात नही है।

विशेष बात– कैंसरग्रस्त रोगी को सर्वप्रथम आयुर्वेदिक सिद्धान्त के अनुसार पंचकर्म विधि से शरीर की शुद्धि कर लेना आवष्यक है।  भोजन हल्का और सुपाच्य एवं अल्प मात्रा में दें। अधिक मात्रा में आहार द्रव्य न दें। गरिष्ठ भोजन का परित्याग करें।